वाराणसी। आनंद कानन आज प्रदूषण की गिरफ्त में है। हम अपनी जीवन रेखा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हमें खुद को पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा समझना होगा न कि मालिक। हमने विकास की गलत अवधारण को अंगीकार किया है। आज आदमी पेड़, पहाड़, नदियों को ही खा रहा है और अभी भी यह लगातार होता जा रहा है। अधिकांश धरोहरें अतिक्रमण की जद में हैं। तालाब, पोखरे, बागीचे को पाटकर बनारस के स्वरूप को बिगाड़ दिया गया। उक्त विचार प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने कहीं।
वह बुधवार को काशी कथा कार्यशाला के पांचवें दिन युवाओं को संबोधित कर रहे थे। कहा कि हमें प्रकृति को बैंक की तरह समझना होगा जहां हम पहले जमा करें तब उसका उपयोग करें। कार्यशाला के प्रथम सत्र में डॉ. राकेश पांडेय ने स्वतंत्रता आंदोलन और काशी विषय पर बोलते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में काशी का सबसे बड़ा योगदान बीएचयू का है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एसएन उपाध्याय, संचालन डॉ. सुजीत चौबे तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अवधेश दीक्षित ने किया। इस दौरान डॉ. विकास सिंह, अरविंद मिश्र, दीपक तिवारी, गोपेश पांडेय, जसमिंदर कौर, विनय कुमार सिंह, गोविंदा मालिक, हेमा वागेश्वरी, प्रीति यादव, अक्षरा नाथ आदि मौजूद रहे।