वाराणसी। चौबेपुर थाना के नरायनपुर निवासी कैलाश यादव पर जानलेवा हमले के मामले में मुन्ना बजरंगी के रिश्तेदार आशीष सिंह उर्फ सोनू के साथ ही पुलिस को संदहा निवासी उसके गुरु संदहा के प्रधान विजय बहादुर सिंह उर्फ जेलर की भी भूमिका संदिग्ध प्रतीत हुई है। वारदात के बाद आशीष के साथ ही जेलर भी घर छोड़ कर भागा हुआ है। इस वजह से उस पर पुलिस का शक और गहराया है। वहीं, सर्विलांस की मदद से भी यह सामने आया है कि कैलाश को गोली मारने के बाद आशीष ने आखिरी बार जेलर से ही संपर्क किया था। हालांकि लगातार छापामारी और सुरागकशी के 48 घंटे बाद भी पुलिस दोनों का पता नहीं लगा सकी है।
हत्या के मामले में निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा प्राप्त और हाईकोर्ट से जमानत पाकर जेल से बाहर आए कैलाश यादव को लेढूपुर स्थित पावर हाउस के पास बुधवार की शाम नौ एमएम की पिस्टल से चार गोली मारी गई थी। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कैलाश की हालत फिलहाल स्थिर है। कैलाश के भाई कमलेश यादव की तहरीर पर सारनाथ थाने में मुन्ना बजरंगी के रिश्तेदार सारनाथ के लोहिया नगर निवासी आशीष सिंह उर्फ सोनू और एक अज्ञात के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। सारनाथ पुलिस के अनुसार अब तक की तफ्तीश में यह सामने आया है कि आशीष अपने गुरु जेलर की राय के बिना कोई काम नहीं करता था। दोनों साथ ही रहते थे। जेलर प्रधान संघ का अध्यक्ष भी बताया गया है। कैलाश को गोली मारने के बाद जेलर के घर पर आशीष गया था और उसके बाद से ही दोनों फरार है। दोनों की तलाश में चार पुलिस टीमें शुक्रवार की देर रात तक गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़ और चंदौली में दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर छापामारी कर चुकी थी। साथ ही, एक पुलिस टीम गुरुवार को नई दिल्ली भी भेजी गई है लेकिन अब तक दोनों का सुराग नही लग सका है। इस संबंध में इंस्पेक्टर सारनाथ ने बताया कि आशीष के साथ ही विजय बहादुर सिंह की भी भूमिका संदिग्ध प्रतीत हुई है। दोनों की तलाश में छापामारी और उनके करीबियों से पूछताछ का सिलसिला जारी है। संभावना है कि जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।