भदोही। बैंकिंग लोकपाल डीके श्रीवास्तव ने कहा कि बैंक सिक्के लेने से मना नहीं कर सकते। कटे-फटे अथवा लिखे हुए नोटों को भी लेने से बैंक इंकार नहीं कर सकते। यदि बैंक सिक्के नहीं स्वीकार कर रहे हैं तो पहले प्रबंधक से कहें। 30 दिन इंतजार के बाद बैकिंग लोकपाल से शिकायत करें। वह शनिवार को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के सभागार में बैंकिंग ग्राहक सेवा पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
बैंकिंग लोकपाल ने कहा कि बैंकों को आरबीआई का निर्देश है कि वे प्रतिदिन एक खाते में एक हजार रुपए तक के सिक्के जमा करें। सिक्के और लिखे व कटे-फटे नोट लेने से मना करते हैं तो वे भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों का अवहेलना कर रहे हैं। यदि ऐसी समस्या आती है तो पहले उसी शाखा के प्रबंधक को अपनी समस्या लिखित रूप से बताएं। निदान न होने पर लोकपाल में शिकायत करें। आपकी शिकायत सुस्पष्ट, शिकायतकर्ता के नाम, पता और संपर्क नंबर के साथ हो। शिकायत प्रमाणित करने के लिए सभी जरूरी कागजात भी लगाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि यदि मामला किसी न्यायालय अथवा फोरम पर चल रहा हो तो बैंकिंग लोकपाल से शिकायत का औचित्य नहीं बनता।
बैंकिंग लोकपाल ने कहा कि ग्राहक बैंक से जुड़ी इस तरह की अन्य शिकायतें भी कर सकते हैं। उन्होंने ग्राहकों से कहा कि बैंक आपको लोन देकर जबरन अपने उत्पाद नहीं बेच सकते। यह भी कहा कि आपके चेक भुनाने में देरी होने, अधिक शुल्क चार्ज करने पर आप संतुष्ट न हों तो लोकपाल में शिकायत कर सकते हैं। निर्यातक आरके बोथरा ने बैंकों द्वारा अलग-अलग न्यूनतम राशि रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैंक ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि इस पर आरबीआई द्वारा कोई रोक नहीं है।
इस मौके पर लोगों को एटीएम से रुपए निकालने और इंटननेट बैंकिंग में सावधानियां बरतने के अलावा ऑनलाइन भुगतान की बारीकियों से अवगत कराया। कहा कि बैंकों या एटीएम केंद्रों पर किसी के झांसे में न आएं। उन्होंने बैंक कर्मियों से मित्रवत व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया। अध्यक्षता एकमा उपाध्यक्ष शिवसागर तिवारी ने की। एसबीआई शाखा प्रबंधक एके विश्वकर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उप महाप्रबंधक व सेक्रेट्री एसके दास, आरएन द्विवेदी, एके अग्निहोत्री, एकमा के मानद सचिव पियूष बरनवाल ने भी संबोधित किया। रवि पटोदिया, राजेश कुमार जायसवाल, प्रकाश जायसवाल, हाजी अब्दुल सत्तार, जेपी गुप्ता, एचएन मौर्य, इस्तीयक खां आदि उपस्थित रहे।