लालानगर। त्याग और मेहनत से गरीब बच्चों की तकदीर संवारने का बीड़ा मनीषा ने उठाया है। नवरात्र में देवी आराधना के उत्सव के बीच उनके संघर्ष और बलिदान की कहानी नारी शक्ति की सच्ची तस्वीर पेश करती है। बात हो रही है गोपीगंज क्षेत्र के जोगिनका गांव में रहने वाली मनीषा सिंह की, जिन्होंने घर-परिवार और समाज के लिए अपनी इच्छाओं को तिलांजलि दे दी। भाइयों के कॅरियर के लिए उन्होंने शादी नहीं की। वहीं, आठवीं तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देती हैं।
समाजसेविका मनीषा सिंह ने बताया कि बचपन से ही चुनौतियां सामने आने लगीं। कहा कि मेरा परिवार जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष कर रहा था। जब मैंने इंटर की परीक्षा दी, उस समय अपने दादा रामजियावन सिंह के साथ हाईस्कूल के बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर हमें परिवार की जिम्मेदारी उठाने की ट्रेनिंग मिली। इस कोचिंग के बाद वर्ष 2000 में मैंने गांव में विद्यालय की स्थापना की। 10 वर्षों की मेहनत के बाद पारिवारिक समस्याओं के कारण विद्यालय का बंद हो जाना मुझे अंदर से विचलित कर गया। छह महीने तक भटकाव के बाद नगर के विद्यालय, जिनकी संख्या लगभग सात थी। बाद में ज्ञानपुर ब्लॉक के सभी परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील संचालन की जिम्मेदारी के साथ 35000 बच्चों को खाना खिलाने का मौका मिला। सफल संचालन के बाद डूडा के माध्यम से सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना कर छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षित किया। अपने दो भाइयों को पढ़ा-लिखाकर उन्होंने मुकाम दिलाया। कहा कि वर्तमान मैं अपने गांव में लिटिल जीनियस नाम का विद्यालय चला रही हूं, जहां बच्चों को उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा दी जा रही है। मामूली आय से अपने परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रही हूं। उन्होंने बताया कि परिवार में माता-पिता समेत चार भाई बहन हैं।