वाराणसी। कांचीकाम कोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती का काशी से गहरा नाता था। कांचीकाम कोटि पीठ का शंकराचार्य बनने के बाद वह पहली बार 1973 में काशी आए। लगभग तीन हजार किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए जब वह रामनगर के रास्ते काशी में दाखिल हुए तो उनका राजशाही स्वागत किया गया था। हनुमान घाट स्थित मठ में तब उन्होंने प्रवास किया था। आखिरी बार 2013 में वह भाजपा सांसद वरुणा गांधी की शादी में काशी आए थे। उनके ही सानिध्य में शादी की रस्में कांची कामकोटेश्वर मंदिर में हुई थीं।
हनुमान घाट स्थित माधवाचार्य मठ के व्यवस्थापक भाऊ आचार्य टोनपे के अनुसार, शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती के दिल में काशी से बसती थी। पहली बार जब वह अपने तीन सौ अनुयायियों के साथ कांची से करीब तीन हजार किमी की पदयात्रा करते हुए काशी पहुंचे थे, तब यहां हजारों श्रद्धालुओं ने राजशाही ठाट-बाट के साथ उनका भव्य स्वागत किया था। हाथी, घोड़े और ऊंट, बैंड-बाजे के साथ वह मठ पहुंचे थे। तमिलनाडु के थंजाउर में 18 जुलाई 1935 में जन्मे जयेंद्र सरस्वती के देहावसान से काशी का संत समाज और श्रद्धालु मर्माहत हैं। सात मार्च 2013 में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के पुत्र सांसद वरुण गांधी की शादी भी काशी में उनकी उपस्थिति में श्रीकाशी कामकोटीश्वर मंदिर में हुई।