वाराणसी। जिला जेल के डिप्टी जेलर रहे अनिल त्यागी की हत्या 23 नवंबर 2013 को मुन्ना बजरंगी ने अपने गुर्गों से कराई थी। रविवार को धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में वांछित शूटर बैरिया (बलिया) के मधुबनी निवासी चंदन सिंह उर्फ रोहित को कैंट क्षेत्र से गिरफ्तार करने के बाद यह खुलासा एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने किया। चंदन के पास से .32 बोर की अवैध पिस्टल और चार कारतूस बरामद कर उसे कैंट पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया। गौरतलब है कि इस मामले का खुलासा सात मई 2014 को कर कैंट पुलिस ने मऊ निवासी बदमाश रमेश सिंह काका सहित छह बदमाशों को अनिल त्यागी का हत्यारोपी बताते हुए जेल भेजा था। ऐसे में एसटीएफ के खुलासे ने तत्कालीन कैंट इंस्पेक्टर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बीते 21 मार्च को धनबाद के सरायढेला क्षेत्र में कांग्रेस नेता नीरज सिंह सहित चार लोगों पर सौ राउंड से ज्यादा फायरिंग कर दिनदहाड़े हत्या की गई थी। नीरज के चचेरे भाई विधायक संजीव सिंह, जयनेंद्र सिंह, गया सिंह, महंत पांडेय और सिद्धार्थ गौतम नामजद किए गए। वहीं, संजय सिंह, धनजी सिंह और डब्लू मिश्र का नाम सामने आया मगर शूटर पकड़े नहीं गए। तफ्तीश के लिए एसटीएफ के एएसपी एस. आनंद और ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद के निर्देशन में इंस्पेक्टर शैलेष प्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम लगाई गई। तीन मई को अंबेडकरनगर जिले के अमन सिंह और उसके दोस्त की गिरफ्तारी हुई तो पता चला कि नीरज हत्याकांड में उसके अलावा तीन और शूटर थे। इसके बाद 23 जून को एसटीएफ ने सुल्तानपुर जिले के कुर्बान अली उर्फ सोनू को और 24 जून को प्रतापगढ़ जिले के सागर सिंह उर्फ सीबू को गिरफ्तार किया। अमन, कुर्बान और सागर से मिली जानकारी के आधार पर चौथे शूटर के रूप में चंदन को चिह्नित किया गया। पता लगा कि चंदन एक अरसे से सारनाथ के तिलमापुर क्षेत्र की न्यू कॉलोनी में रह रहा है।
इसी बीच पता लगा कि रविवार सुबह चंदन कैंट क्षेत्र की सेंट मैरी स्कूल के पास अपने दोस्त से मिलने आ रहा है तो एसटीएफ इंस्पेक्टर शैलेष प्रताप सिंह ने अपनी टीम के इंस्पेक्टर पुनीत परिहार, एसआई अमित श्रीवास्तव और अंगद यादव के साथ घेरेबंदी की। खुद को घिरता देख चंदन ने दो राउंड फायरिंग की लेकिन वह दबोच लिया गया। चंदन ने बताया कि सुल्तानपुर के पंकज सिंह के माध्यम से वह मिर्जापुर जेल में बंद रिंकू सिंह के संपर्क में आया। पंकज के कहने पर वह 19 मार्च को वाराणसी आया था। पंकज ने सोनू और सीबू से मुलाकात कराई। चंदन ने बताया कि उसने, अमन, सोनू और सीबू ने नीरज और उनके साथियों की हत्या की। वारदात के बाद वह कुछ दिन वाराणसी रहा और फिर गुजरात के जामनगर भाग गया था। वारदात के एवज में मिलने वाले पांच लाख रुपये पंकज से लेने के लिए आया था लेकिन इसके पहले पकड़ लिया गया।
एसटीएफ को चंदन ने बताया कि 23 नवंबर 2013 को पांडेयपुर स्थित जिम के सामने जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या की साजिश रचने से लेकर वारदात को अंजाम देने तक में वह शामिल रहा। उन दिनोें मुन्ना बजरंगी और रमेश काका दोनों जिला कारागार में निरुद्ध थे। अनिल त्यागी के रहते वे मनमानी नहीं कर पाते थे। इस वजह से दोनों डिप्टी जेलर से नाराज थे। चंदन ने बताया कि वह जेल में मुन्ना बजरंगी से मिलने जाता था। इसी दौरान मुन्ना ने चंदन, राजेश चौधरी, रिंकू सिंह, अमजद और वकील पांडेय को डिप्टी जेलर की हत्या का जिम्मा सौंपा। चंदन ने बताया कि उसने और राजेश चौधरी ने तीन दिन तक रेकी की और वारदात को अंजाम देने के लिए पांडेयपुर में जिम के बाहर का स्थान चुना। 23 नवंबर 2013 को अनिल त्यागी जैसे ही जिम के सामने कार से उतरे, अंधाधुंध गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी गई। चंदन ने बताया कि वर्ष 2014 में राजेश चौधरी की हत्या हो गई थी जबकि रिंकू, अमजद और वकील पांडेय जेल में हैं।