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पद्म विभूषण पं किशन महाराज के स्मृति संगीतोत्सव का किया गया आयोजन

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वाराणसी। पदम विभूषण पंडित किशन माहाराज की स्मृति में शनिवार को पराड़कर भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें उनको सुर लय और ताल से संगीतांजलि दी गई। इसमें कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर उनको याद किया।
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स्मृति संगीतोत्सव की शुरूआत किशन महाराज के चित्र पर पंडित पूरण महाराज और मुख्य अतिथि अहमदाबाद से पधारे डा. एमबी पटेल , शर्मिष्ठा, अंजली मिश्रा सहित तमाम शिष्य और कलाकारों ने माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित करके किया। वहीं कार्यक्रम की शुरूआत युवा नर्तकी कुमारी ममता मिश्रा ने मां सरस्वती की अराधना से की।
दूसरे कार्यक्रम के बेनी साहब लूधियाना से पधारे मंसा सिंह नामधारी का एकल तबला प्रारंभ हुआ। इन्होंने तीन ताल में पंजाब घराने का पारंपरिक तबला बजाया। तबले में पेशकार, कायदा, रेला, टुकड़ा, तिहाई के साथ ही पंजाब घराने की कुछ प्रसिद्ध बंदिशों को प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। इनके साथ युवा सारंगी वादक विनायक सहाय ने सुरीला संगत करके कार्यक्रम को सफल बनाया। तीसरी प्रस्तुति दिल्ली के कलाकार दिव्यांश हर्षित ने संतूर वादन किया। इसमें उन्होंने राग मालकौंस में आलाप, जोड, झाला के बाद तीन ताल में गत की प्रस्तुती की। इनके साथ तबले पर आनंद मिश्रा ने और मंसा सिंह ने संगत किया। चौथे कार्यक्रम में अहमदाबाद से पधारी पद्मभूषण पंडित राजन साजन मिश्रा की शिष्या डा. विराज अमर ने गायकी से हुई। इसमें उन्होंने राग जोग कौंस में विलंबित और फिर द्रुत में रचना सुनाई। बंदिश के बोल थे पीर पराई सुनाकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। तबले पर पं. राजेश मिश्र और हारमोनियम पर जमुना बल्लभ दास गुजराती और शिवानी मिश्रा ने किया। पांचवे कार्यक्रम में डां. प्रेम किशोर मिश्रा के सितार की त्रिगलबंदी हुई। इसमें उन्होंन अपने दोनों पुत्रों अभिषेक और शिवांग के साथ राग बागेश्वरी में अलाप जोड़ झाला, विलंबित गत, द्रुत गत और झाला बजाया। अंतिम कार्यक्रम प्रख्यात तबला वादक पं. संजू सहाय ने बजाकर कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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