वाराणसी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के चुनाव में प्रतिद्वंद्वियों से कम खर्च कर बड़ी जीत हासिल की थी। पूरे चुनाव में उन्होंने महज 37 लाख 60 हजार रुपये खर्च किए थे और पांच लाख 81 हजार से ज्यादा मत पाए थे। दूसरी तरफ उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे और 3 लाख 71 हजार मतों से पीछे रह गए थे। ऐसे में भाजपा कम खर्च में फिर से बड़ी जीत के लिए कार्ययोजना तैयार करने में जुट गई है।
वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के प्रत्याशी से कम पैसे खर्च किए थे। बावजूद इसके आप के अरविंद केजरीवाल 3.71 लाख वोटों से पीछे रहे और कांग्रेस के अजय राय की जमानत जब्त हो गई थी। जबकि अजय राय ने सबसे ज्यादा 54.45 लाख रुपये खर्च किए थे। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने 50.10 लाख रुपये चुनाव प्रचार में लगाए थे। अधिकारियों ने बताया कि समाजवादी पार्टी के कैलाश चौरसिया ने 24.54 लाख और तृणमूल कांग्रेस की इंदिरा तिवारी ने 14.58 लाख रुपये खर्च किए थे। पीएम मोदी की ओर से फाइल किए गए खर्च के विवरण में वाराणसी की सभाओं पर 9.46 लाख रुपये और चुनाव सामग्री पर 9.41 लाख रुपये लगाए गए थे। वाहनों पर उनके 5 लाख पांच हजार और प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के विज्ञापन पर 3.78 लाख रुपये खर्च हुए थे। इससे अलग आम आदमी पार्टी ने सबसे ज्यादा 20 लाख 53 हजार रुपये रोड शो पर खर्च किए थे। कांग्रेस ने ई-मीडिया, एसएमएस, केबल नेटवर्क, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ही 24.92 लाख रुपये खर्च कर दिए थे। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी ने वाराणसी लोकसभा सीट से मैदान में उतरकर पूर्वांचल में विपक्षी दलों का सफाया कर दिया था। आजमगढ़ में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को छोड़कर कोई भी सीट विपक्षी दलों के खाते में नहीं गई थी। मगर, इस बार सपा और बसपा के गठबंधन के कारण राजनीतिक हालात बदले हुए हैं। ऐसे में विपक्षी दलों के चक्रव्यूह को भेदने के लिए भाजपा भी नई रणनीति के साथ मैदान में होगी।