वाराणसी। शहर को स्मार्ट बनाने और ड्रेनेज व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए अंग्रेजों के जमाने के शाही नाले के जीर्णोद्धार का काम अधर में लटक गया है। ढाई साल पहले 100 करोड़ की इस परियोजना को छह माह में पूरा करना था लेकिन अब तक शाही नाले का जीर्णोद्धार नहीं हुआ। बढ़ते समय के साथ परियोजना की लागत बढ़कर 130 करोड़ पहुंच गई है। काम में तेजी लाने के लिए कई बार नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने भी पहल की लेकिन सुधार नहीं हुआ।
शाही नाले के जीर्णोद्धार के काम में तेजी लाने के लिए कई बार पार्षदों ने सदन के पटल पर भी इस मसले को रखा। विपक्ष के कांग्रेस पार्षद दल नेता सीताराम केशरी ने आधा दर्जन बार इसकी अधिकारियों से शिकायत की। सदन के पटल पर भी इसे कई बार उठाया गया। शाही नाले की सफाई नहीं होने के कारण जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जगह-जगह सीवर ओवरफ्लो से लोग त्रस्त हैं लेकिन इस समस्या की ओर अधिकारियों का बिल्कुल ही ध्यान नहीं है। कार्यदायी एजेंसी की टाइम लाइन बढ़ती गई और अफसर चुप्पी साधे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। एक समय ऐसा भी आया जब कार्यदायी संस्था ने हाथ खड़ा कर दिए। बावजूद इसके उसी संस्था से काम करवाने पर शासन और प्रशासन आमादा हैं।
शाही नाले की सफाई रेवड़ी तालाब से कोनिया तक होनी है। शुरूआत में ढलान दिशा कोनिया से इसके सफाई की शुरूआत हुई लेकिन बाद में इसे रेवड़ी तालाब से शुरू कर दिया गया। वर्तमान में रेवड़ी तालाब, गोदौलिया, बेनिया, कबीरचौरा, मैदागिन, मच्छोदरी, कज्जाकपुरा होते हुए कोनिया तक इसकी सफाई करनी है। काम में तेजी और सीवरेज के बहाव को डायवर्ट करने के लिए गिरिजाघर से लहुराबीर, मैदागिन से कबीरचौरा तक लोहे की ओवरफ्लो लाइन डालकर काम किया जा रहा है। अभी 50 प्रतिशत भी काम पूरा नहीं हुआ है। नोडल विभाग नगर निगम है। जबकि कार्यदायी संस्था जल निगम है। शुरूआती दौर में इस काम की जिम्मेदारी किसी एजेंसी ने ली। बाद में उसने हाथ खड़े कर दिए तो एजेंसी बदली गई। सूत्र बताते हैं कि पुरानी एजेंसी के नाम पर ही वर्तमान में श्रीराम नाम से कोई नई एजेंसी काम कर रही है। कबीरचौरा के पास पाइप लाइन डालने से डॉ. गांगुली वाली गली की सीवरेज लाइन चोक हो गई है, जिससे वहां बीते छह माह से सीवरेज ओवरफ्लो हो रहा है। न तो जलकल ही इसे साफ करवा रहा है और न जल निगम ही कोई उपाय कर रहा है। करीब 50 घरों के लोग रोजाना समस्या झेल रहे हैं।