वाराणसी। अब राज्य की सीमाओं पर बने चेकपोस्ट पर बिना किसी वाहन को रोके यह पता लगाया जा सकेगा कि माल का ई-वे बिल है या नहीं। एक नवंबर से सभी चेकपोस्ट पर रैफिड (रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस) काम करना शुरू कर देगी। कई चेकपोस्ट पर इसका ट्रायल शुरू भी हो गया है। कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए जीएसटी काउंसिल ने सभी प्रदेशों की सीमाओं पर रफिड लगाने का फैसला लिया था। इसके तहत गैर प्रांतों से प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले चयनित 41 स्थानों पर रफिड को लगाने का जिम्मा ‘स्कैन नेट’ नामक कंपनी को दिया गया है जिसने इस काम को लगभग पूरा कर लिया है। डिवाइस का प्रशिक्षण इन दिनों चल रहा है। इसकी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी। सरकार इसे ऑपरेट करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर देगा। इसके बाद इस सिस्टम को अमल में लाना शुरू किया जाएगा। रफिड कैसे काम करेगा, इस डिवाइस से कैसे ट्रांसपोर्टर जुड़ेंगे, इसको लेकर ट्रांसपोर्टरों को आठ अक्तूबर से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मालवाहनों में लगेगी माइक्रो चिप
- प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले रास्तों पर ‘स्कैन नेट’ कंपनी के कर्मचारी तैनात रहेंगे जो यहां से गुजरने वाले मालवाहनों में एक माइक्रो चिप लगाने का काम करेंगे। यह चिप रफिड नामक डिवाइस की मैपिंग से जुड़ा होगा। इस चिप के लगते ही मालवाहन के मूवमेंट का पता रफिड के माध्यम से कंट्रोल रूम में बैठे विभागीय अधिकारी को कंप्यूटर स्क्रीन पर चलता रहेगा। यदि मालवाहक ई-वे बिल में उल्लिखित मार्ग के अलावा दूसरा रास्ता पकड़ता है तो तत्काल उसके खिलाफ आसानी से विभाग कार्रवाई कर सकेगा। ऐसा होने से कर चोरी की संभावना न के बराबर होगी। कंपनी पांच साल तक इस डिवाइस का रखरखाव भी करेगी।