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चार दिन बाद हाथ नहीं आए नामजद आरोपी

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वाराणसी। आईआईटी बीएचयू में डीजे नाइट्स का विरोध करने और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार से रंगदारी मांगने के आरोपी छात्र आशुतोष सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में बवाल करने में नामजद एक भी आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। 20 दिसंबर को परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी के आरोप में नामजद 15 छात्रों को पुलिस अभी तलाश कर रही है तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनमें से किसी को निलंबित तक करने की जहमत नहीं उठाई है। दोनों की ढिलाई पर सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि कार्रवाई को लेकर ऐसी ही उदासीनता रही तो परिसर में अराजकता पर नियंत्रण करना मुश्किल होगा।
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रविवार को लंका पुलिस ने जिस छात्र की गिरफ्तारी की है, उसे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पहचाना गया है। बाकी जिन पर मुकदमे दर्ज हैं, उनमें से एक भी नहीं पकड़ा जा सका है। 20 दिसंबर की घटना के बाद आईजी रेंज से लेकर एसएसपी और एसपी सिटी तक ने सभी को जल्दी ही गिरफ्तार करने का दावा किया था। बावजूद इसके चार दिन बाद नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, उससे इन दावों की हवा निकल गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज तलाशने की बात कर रही है तो क्या अब तक सीसीटीवी फुटेज ही नहीं देखे गए है? अगर देखे गए तो क्या जिन पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने नामजद मुकदमा दर्ज कराया है, उनमें से कोई भी फुटेज में नहीं है? बाहरी लोग परिसर में आकर तोड़फोड़ कर जाते हैं और विश्वविद्यालय के सुरक्षा गार्ड इन पर कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साध जाते हैं।
उधर, विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह को जानलेवा धमकी देने वाले शेखर सिंह मंगलम पर भी नामजद मुकदमा दर्ज है, फिर भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो रही है। ताज्जुब है कि आरोपी की कॉल डिटेल, उसके गांव और उसके रसूख के बारे में जानकारी होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पूरे मामले को किसी और विवाद में उलझाने की लगती है। शेखर सिंह ने डॉ. राजेश सिंह के बेटे को जान से मारने की धमकी दी है।
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