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जनजातियों में बसता है भारत का असली इतिहास

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वाराणसी। भारतीय इतिहास संकलन समिति काशी का प्रांतीय अधिवेशन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग में आयोजित किया गया। अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो. रजनीश शुक्ल ने कहा कि वाल्मीकि ने एक पात्र को समाने रखकर रामायण की रचना की जो अपने आप में एक ऐतिहासिक स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारत का असली इतिहास जनजातियों में बसता है। इतिहास लेखन में देशज इतिहास के साथ साथ स्थानीय इतिहास के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
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अधिवेशन में समिति के नवीन कार्यकारिणी का चुनाव संपन्न हुआ जिसके अध्यक्ष प्रो. सुमन जैन बनाए गए। कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर सिंह बनाए गए। वहीं उपाध्यक्ष प्रो. विजय लक्ष्मी शर्मा व डॉ. अव्यक्तराम मिश्र, महासचिव डॉ. श्रीपाल सिंह सोम व सचिव डॉ. सुशील पांडेय चुने गए। कोषाध्यक्ष डॉ. हेमलता सिंह, ऊर्जस्विता सिंह व आरती पांडेय बनीं। सदस्य के तौर पर डॉ. सत्येंद्र मिश्र, डॉ. अशोक चौधरी, डॉ. बृजभानु सिंह, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. सरोज रानी, डॉ. प्रशांत कश्यप, डॉ. प्रवेश भारद्वाज नामित किए गए। इसी तरह वरिष्ठ इतिहासकार परिषद, युवा इतिहासकार परिषद और महिला इतिहासकार परिषद का भी गठन हुआ। ये चुनाव राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. देवी प्रसार सिंह और राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बाल मुकुंद पांडेय की देखरेख में हुआ। इससे पहले अतिथियों का स्वागत संयोजक प्रो. आनंद शंकर सिंह ने किया।
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