गुजरात के आरक्षण आंदोलन की आग सोमवार को काशी में भी उस वक्त महसूस की गई जब अति पिछड़ी 17 जातियों के लिए 15 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय दफ्तर घेर लिया।
सैकड़ों की संख्या में पहुंचे आंदोलनकारियों से निबटने के लिए प्रशासन ने पहले से ही वहां भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। पुलिस का प्रयास था कि प्रदर्शनकारी ज्ञापन सौंपकर लौट जाएं मगर प्रदर्शनकारियों के तेवर देख पुलिस ने कार्यालय को सुरक्षा घेरे में ले लिया। भारी पुलिस बल देख भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने रविंद्रपुरी की एक लेन जाम कर दी।
प्रदर्शन के दौरान रास्ते में कोई हंगामा न हो, इसके लिए पुलिस-प्रशासन पहले से सतर्क था। प्रदर्शनकारी पुलिस के घेरे में ही मोदी के संसदीय दफ्तर पहुंचे। वहां पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें लौटाना चाहा मगर वे प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एडवोकेट बीके निषाद ने बताया कि जल्द ही संगठन लखनऊ में अपनी ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन करेगा। 25 अक्तूबर को आरक्षण के लिए लखनऊ में विशाल प्रदर्शन होगा। उन्होंने सपा और बसपा पर वोट के लिए कोरा आश्वासन देने का आरोप लगाया।
साफ कहा कि बिना 15 फीसदी आरक्षण लिए यह आंदोलन खत्म होने वाला नहीं। प्रदर्शन करने वालों में विकास चौधरी, प्रवेंद्र प्रताप सिंह, रामानंद पासवान, विनोद बिंद, जितेंद्र राजभर, दिनेश प्रजापति, दिनेश लोधी, योगेश राव, सत्यवीर सिंह कन्नौजिया, रीता पाल, प्रदीप माही, सूरजभान पटेल, अरुण मौर्या आदि शामिल थे।