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12-12 लाख लेकर मजदूर चाचा-भतीजा के शव ले गए परिजन

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वाराणसी। चौकाघाट लकड़ी मंडी के समीप सीवर लाइन की जहरीली गैस में जान गंवाने वाले मजदूर दिनेश पासवान (27) और उसके भतीजे विकास (18) के परिजन ठेकेदार से 12-12 लाख रुपये का चेक लेकर शनिवार की देर रात घर चले गए। प्रकरण को लेकर चेतगंज थाने में दिनेश और विकास के परिजनों की ओर से तहरीर नहीं दी गई है। वहीं, हिरासत में लिए गए ठेकेदार पंकज श्रीवास्तव को पुलिस ने छोड़ दिया।
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चौकाघाट सीवेज पंपिंग स्टेशन के पीछे गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा सीवर लाइन में प्लगिंग का काम कराया जा रहा था। बिहार के भभुआ का मधरौना का मजदूर सत्येंद्र पासवान और दिनेश व उसका भतीजा विकास तीनों मैनहोेल में काम कर रहे थे। सत्येंद्र के अनुसार ठेकेदार ने प्लग तोड़ने के बाद उन्हें दोबारा नीचे उतर कर अवजल का बहाव देखने के लिए कहा। अवजल छूटते ही जहरीली गैस के कारण दिनेश और विकास अचेत हो गए। सत्येंद्र ने चाचा-भतीजा को बचाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुआ। पुलिस की सूचना पर पहुंचे 11 एनडीआरएफ के जवान राहत-बचाव कार्य में लगे और पहले विकास फिर दिनेश का शव बाहर निकाला गया। डीएम सुरेंद्र सिंह के निर्देश पर आधी रात बाद दोनों के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इंस्पेक्टर चेतगंज ने बताया कि दिनेश और विकास के परिजनों के घटना के संबंध में तहरीर नहीं दी है। दोनों का शव उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया और वो घर चले गए हैं। किसी तरह का आरोप न होने के कारण ठेकेदार पंकज को छोड़ दिया गया है।
भाई बोला - पर्याप्त नहीं मुआवजा, पत्नी और बच्चे बेसुध
दिनेश के भाई गुद्दर ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि दोनों के लिए 12-12 लाख का मुआवजा दिया गया है लेकिन यह परिवार के भरणपोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। विकास की शादी हुए अभी साल भर भी नहीं हुआ है और उसकी पत्नी गर्भवती है। उधर, दिनेश की पत्नी कल्ली देवी और उसके चार बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। दिनेश और विकास के साथ मैनहोल में उतरे सत्येंद्र के भी पैर में चोट आई है। शनिवार की रात ही सत्येंद्र को भी लिखापढ़ी कर उसके घर भेज दिया गया। सत्येंद्र के अनुसार तीनों को काम कराने के लिए हुकुलगंज लेबर मंडी से लाया गया था।
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अब इहां काम करे से डर लगत हौ
चौकाघाट सीवेज पंपिंग स्टेशन के पीछे रेलवे लाइन के काम में लगे बिहार निवासी मजदूर लल्लू चौधरी और पश्चिम बंगाल निवासी अतउर ने बताया कि शनिवार को जब दिनेश और विकास की जहरीली गैस के कारण मौत हुई थी तो वह भी वहीं मौजूद थें। रेलवे के लोगों ने काम रोकवा दिया था लेकिन रविवार को फिर से वहां मजदूरों को पेंट समेत अन्य काम के लिए लगा दिया गया। दोनों ने कहा कि अब इहां काम करे से डर लगत हौ...। हमन के भी सुरक्षा के कउनो चीज न देवल गयल हौ...। दो मजदूरों की मौत के बाद भी चौकाघाट सीवेज पंपिंग स्टेशन के आसपास काम में लगे मजदूरों की सुरक्षा से घोर दर्जे की लापरवाही बरती जा रही है लेकिन इस मसले पर संबंधित विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। उधर, सीवेज पंपिंग स्टेशन का काम बंद रहा और ठेकेदार व मजदूर नहीं दिखाई दिए।
स्लैब जगह-जगह से चिटका, हो सकता है हादसा
12 नवंबर को चौकाघाट सीवेज पंपिंग स्टेशन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना है। तैयारियां जोरों पर चल रही हैं लेकिन सीवेज पंपिंग स्टेशन की पिछली दीवार पर किसी की नजर नहीं जा रही है। पंपिंग स्टेशन की पिछली दीवार की सपोर्ट के लिए बनाया गया स्लैब जगह-जगह से चिटक गया है। बीच-बीच में करीब पांच से सात इंच का गैप हो गया है। बगल में ही रेलवे के द्वारा निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। यदि स्लैब ढहा तो हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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