वाराणसी। प्रवासी भारतीय सम्मेलन में प्रदेश के 80 जिलों से एक-एक खास उत्पाद का प्रचार किया जाएगा। मेहमानों के समक्ष इनकी खास अंदाज में प्रस्तुति की जाएगी और उनसे संवाद कर इन उत्पादों के निर्यात की संभावना तलाशी जाएगी। ज्यादातर हस्तशिल्प उत्पादों को चीन से टक्कर मिलने के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है।
जिलों की पहचान बने उद्योगों के लिए विदेशों में बाजार तलाशना प्रदेश सरकार का उद्देश्य है। हर जिले के शिल्प कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए प्रवासी भारतीय सम्मेलन में वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट की प्रस्तुति की योजना है। सम्मेलन के दौरान डेढ़ घंटे के सत्र में इन उत्पादों की खूबियां मेहमानों को बताईं जाएंगी। सरकार ने इसी उद्देश्य से विदेश मंत्रालय से सम्मेलन में 80 स्टाल लगाने की अनुमति मांगी है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और निर्यात प्रोत्साहन विभाग ने सम्मेलन के लिए सभी जिलों के उद्यमियों को न्यौता भेजा है। इसमें चयनित उद्यमियों के उत्पादों को प्रवासियों के बीच प्रदर्शित किया जाएगा। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि निर्यात की संभावनाओं के लिए विदेशों में बसे प्रवासियों से इसकी चर्चा भी होगी।
इन उत्पादों पर रहेगा खास फोकस
सिल्क उद्योग (वाराणसी), दरी व कालीन (मिर्जापुर), ब्लैक पॉटरी (आजमगढ़), बिंदी (बलिया), पावरलूम (मऊ), प्रेशर कुकर (जौनपुर) लेदर उत्पाद (आगरा), ताला और हार्डवेयर (अलीगढ़), जरी जरदोजी (कासगंज), पीतल के बर्तन (संत कबीरनगर), टेराकोटा (गोरखपुर), फर्नीचर (महाराजगंज), देसी घी (औरेया), इत्र (कन्नौज), इंब्रायडरी (लखनऊ), स्पोर्ट्स गुड्स (मेरठ), मेटल क्राफ्ट (मुरादाबाद) और वुडकार्विंग (सहारनपुर)।