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शौचालय निर्माण में मानक दरकिनार

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जंगीगंज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही भ्रष्टाचार को खत्म करने की मुहिम चला रहे हैं लेकिन जिले में सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी कम नहीं हो रही। स्वच्छता मिशन को भी पलीता लगा रहे हैं। ज्यादातर गांवों में मानक को दरकिनार कर शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी से लेकर ब्लॉक और जिलास्तर तक के अधिकारी, कर्मचारी कमीशन से जेब भर रहे हैं।
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2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन योजना शुरू की थी। इसके तहत गावों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए घर-घर शौचालय बनाने का काम शुरू हुआ। प्रति शौचालय धनराशि को बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दी गई लेकिन कमीशनखोरी के लालच में औपचारिकता ही पूरी हो रही है। इतने घटिया शौचालय बनाए जा रहे हैं कि कुछ दिन बाद ही ये निष्प्रयोज्य हो जा रहे हैं। मनोहरपुर निवासी बृजेश पांडेय ने सीएम और डीएम को पत्र भेजकर जांच की मांग की। जिले के 80 फीसदी गांवों में यही स्थिति है। नमामि गंगे योजना के तहत डीघ और औराई के गांवों में 45 हजार से अधिक शौचालय बनाए गए, जिनके लिए दो गड्ढे की बजाए सिर्फ एक गड्ढा खोदा गया। मुख्य सचिव के पत्र में कहा गया है कि शौचालय निर्माण में दीवार, छत और हाथ धोने के लिए पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि शौचालय निर्माण की कई गांवों में जांच की गई लेकिन कहीं कमी नहीं दिखी। मनोहरपुर और डीघ के गांवों में शौचालयों की जांच कराई जाएगी।
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