वाराणसी। महिलाओं ने मां गंगा की दुर्दशा को नजदीक से महसूस किया। कहा कि नाले के सामने हम रुक नहीं सकते, सांस नहीं ले सकते तो सोचो मां कितनी पीड़ा में होंगी। नगवा नाले के सर्वेक्षण के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि काशी की पहचान गंगा अब अपना स्वरूप खोती जा रही हैं। नगवा नाले से तुलसीघाट की स्थिति इतनी खराब है कि वहां पर स्नान करने योग्य जल में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा बेहद कम है।
गंगा की स्वच्छता के लिए नारी शक्ति को जागृत करने के मदर्स फार मदर कार्यक्त्रस्म के तहत महिलाओं ने नगवां नाले का सर्वे किया। यह प्रयास संकटमोचन फाउंडेशन एवं ओजग्रीन आस्ट्रेलिया ने तुलसीघाट स्थित स्वच्छ गंगा पर्यावरण एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से किया। मदर्स फॉर मदर टीम की सदस्य आभा मिश्र ने नगवा नाले का सैंपल भी चेक किया और कहा कि मां गंगा भारत ही नहीं, पूरी दुनियां की जीवन रेखा है। ओजग्रीन संस्था की फाउंडर मेंबर सू लेनोक्स का कहना था कि वे सभी गंगा की वर्तमान स्थिति देखकर काफी दुखी हैं, मगर अब यह रूप बदलाव लाएगा। माताओं और बहनों को जोड़कर हम आगे की योजना को कार्यान्वित करेंगे।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं से जुड़ने का आग्रह किया। जिसके लिए एक व्हाट्सएप्प नंबर 9140097432 जारी किया गया। जो भी व्यक्ति इससे जुड़ना चाहे वो जुड़ सकता है। घाट पर सभी ने मानव शृंखला भी बनाई। समारोह का संचालन अलका राय ने किया । इस अवसर पर आस्ट्रेलिया की जोयल, इनरव्हील क्लब वाराणी उदया की अध्यक्ष तनू शुक्ला, डॉ. शारदा सिंह , रोली सिंह, सरोजिनी महापात्रा, निलम मिश्रा, माधुरी शर्मा, अंजली सिंह, शैला बानो, नीतू सिंह, ज्योत्सना शुक्ला, दिव्या कसौधन, दीप्ती कसौधन, शुभिक्षा सिंह सहित दर्जनों महिलाएं मौजूद रहीं।