वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर जगदगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक करने वाले भारत धर्म महामंडल के धड़े ने शुक्रवार को मंत्री सभा की बैठक में दूसरे धड़े पर कई पलटवार किए। चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह, जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभू नाथ उपाध्याय के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया। महामंडल के अध्यक्ष डा. दयानिधि मिश्र के खिलाफ भी मनमाना हलफनामा देने के मामले में प्रस्ताव पारित किया गया। कौंसिल ने इन तीनों पदाधिकारियों पर संस्था विरोधी गतिविधियां चलाने, अवैध बैठकें और घोषणाएं करने के आरोप लगाए। स्वरूपानंद के चयन और अभिषेक के फैसले पर मुहर लगाई गई।
लहुराबीर स्थित महामंडल सभागार में डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी डॉ. हरिजी पाठक के एजेंडे पर बैठक शाम चार बजे आरंभ हुई। महामंडल के उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय ने कहा कि निबंधन कार्यालय में पंजीकृत महामंडल के पदाधिकारियों की सूची में चीफ सेक्रेटरी के पद पर कोई प्यारे सिंह और जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय नाम का है ही नहीं। कौंसिल के सदस्यों के बीच कहा गया कि दयानिधि, प्यारे और शंभू मिलकर भारत धर्म महामंडल में अवैध गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। मनमाने ढंग से बैठकें बुलाकर संस्था विरोधी घोषणाएं कर रहे हैं। इन लोगों ने संस्था में तीन सौ फर्जी सदस्य बना लिए हैं। इस मामले में 20 सदस्यों ने नोटरी देकर आपत्ति दर्ज कराई है। महामंडल की इस बैठक में 21 सदस्यों ने अपनी उपस्थित दर्ज कराई। इसमें 15 सदस्य मौजूद थे, जबकि छह सदस्यों ने प्राक्सी भेजा था।