वाराणसी। मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से पांच साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं का शत प्रतिशत टीकाकरण कराए जाने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग का जो खराब प्रदर्शन रहा है, उसके पीछे आंकड़ेबाजी का खेल ही है। इसमें कोई एक दो नहीं बल्कि बनारस, मऊ, आजमगढ़, लखनऊ, गोरखपुर समेत प्रदेश के कुल 31 जिलें शामिल हैं। मजे की बात तो यह है कि इसमें कागज पर तो 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को टीके लगाए जाने का जिक्र किया गया है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी सूची में रिपोर्ट एकदम अलग है। इससे पता चलता है कि सरकारी सुविधाओं का लाभ कितना मिल रहा है लोगों को।
अस्पतालों में नियमित टीकाकरण चलाए जाने के बाद छूटे बच्चों को टीका लगाने के उद्देश्य से ही अभियान की शुरूआत हुई थी। इसके तहत उन्हें टीबी, काली खांसी, हेपेटाइटिस, पोलियो, जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी को रोकने वाले टीके लगाए जाते हैं। सात दिसंबर को जारी की गई अक्तूबर-नवंबर माह में अभियान की प्रगति रिपोर्ट में कुल 31 जिलों में खराब प्रदर्शन पाया गया है। अब जब इसके कारणों की जांच शुरू हो रही है तो प्रथम दृष्टया इसमें आंकड़ेबाजी का खेल सामने आ रहा है। बनारस की अगर बात करें तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़े में अक्तूबर में 94.3 प्रतिशत और नवंबर में दो साल तक के बच्चों को 96.8 प्रतिशत बच्चों को टीके लगाए जाने का जिक्र है। इस बीच शासन स्तर से जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें तो अक्तूबर-नवंबर माह में ड्यू लिस्ट में क्रमश: 52 और 55 प्रतिशत वालों के शामिल होने का रिकार्ड दर्ज है। साथ ही इसमें उसका भी जिक्र है कि निर्धारित लक्ष्य के बाद भी कई बच्चों को टीके नहीं लग सके। कुछ इसी तरह का आंकड़ा सोनभद्र, जौनपुर, आजमगढ़, भदोही, बलिया, मिर्जापुर और मऊ का है। बनारस समेत अगर सभी जिलों की बात करें तो किसी भी जिले का आंकड़ा 70 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका है।