वाराणसी। नगर निकाय चुनाव में मतदाता सूची से लोगों के नाम गायब होने की शिकायतें तकरीबन हर जिले से आई हैं। लोगों का कहना था कि विधानसभा चुनाव में उनका नाम नाम मतदाता सूची में था लेकिन नगर निकाय चुनाव में सूची से काट दिया गया है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग मंथन कर रहा है। इसके लिए सभी जिला निर्वाचन कार्यालयों से सुझाव मांगे गए हैं। स्थानीय स्तर पर इस प्रस्ताव पर सहमति जताई गई है। आयोग मतदाता पहचान पत्र को आधार से लिंक कराने पर विचार किया जा रहा है। ऐसा करने से नगर निकाय और विधानसभा चुनाव के लिए अलग-अलग मतदाता सूची नहीं बनानी होगी। एक ही मतदाता सूची से दोनों चुनाव कराए जाएंगे।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव केंद्रीय चुनाव आयोग कराता है और नगर निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है। दोनों चुनाव के लिए अलग-अलग मतदाता सूची बनाई जाती है। अक्सर लोग इसे लेकर भ्रमित रहते हैं। दरअसल जरूरी नहीं है कि विधानसभा चुनाव के लिए तैयार मतदाता सूची में अगर किसी का नाम है तो उसका नाम नगर निकाय की सूची में भी हों। दोनों चुनावों के पहले मतदाता पुनरीक्षण के दौरान आवेदन कर मतदाता सूची में नाम जुड़वाया जाता है। इस बार के नगर निकाय चुनाव में शहर में कई ऐसे स्थान थे जहां पूरे मोहल्ले का नाम गया था। मंत्री नीलकंठ तिवारी, एमएलसी चेतनारायण सिंह समेत कई लोगों के नाम सूची से गायब थे। निर्वाचन कार्यालय के सूत्रों की मानें तो आयोग मतदाता सूची को आधार कार्ड से लिंक करने पर विचार कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो अगला लोकसभा और नगर निकाय चुनाव एक ही मतदाता सूची से कराया जाएगा।