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बीएचयू में आज से लगेगी ‘कालाक्षर’ की पाठशाला

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वाराणसी। कैनवास पर कलाकारों को आपने चित्र बनाते तो देखा होगा लेकिन अब यहीं कलाकार कूंची से कठिन से कठिन अक्षरों को नए डिजाइनों में लिख रहे हैं। कुछ इसी तरह का नजारा बीएचयू में गुरुवार से शुरू हो रही तीन दिवसीय आयोजन ‘कालाक्षर 2017’ में देखने को मिलेगा। बीएचयू व्यवहारिक कला विभाग की ओर से 9 से 11 नंवबर तक चलने वाले कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, जिससे युवा कलाकारों को सीखने का मौका मिलेगा।
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विश्वविद्यालय में तीसरी बार होने जा रही कार्यशाला के पहले दिन संगोष्ठी जबकि बाकी दो दिनों में परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर, अस्सी घाट आदि पर कार्यशाला होगी। डिजाइन इनोवेशन सेंटर की ओर से आयोजित कार्यशाला में भाषा, कला एवं तकनीकी के संदर्भ में भारतीय संस्कृति में डिजाइन और प्रवर्तन विषयक कार्यशाला में कैलीग्राफी (खूबसूरत लिखावट) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही तकनीक के इस्तेमाल से इसे किस तरह से और बेहतर बनाया जाए, यह जानने का मौका मिलेगा। लखनऊ, चंडीगढ़, अमृतसर, हैदराबाद, चेन्नई, केरल, मध्य प्रदेश, पटना आदि से 100 से अधिक विशेषज्ञ/कलाकार जुटेंगे। गुरुवार को सुबह 10 बजे उदघाटन जेजे कॉलेज ऑफ अप्लायड आर्ट मुंबई के संकाय प्रमुख प्रो. संतोष क्षीरसागर करेंगे। बतौर विशिष्ट अतिथि आईआईटी बीएचयू निदेशक प्रो. राजीव संगल रहेंगे और अध्यक्षता संकाय प्रमुख प्रो.डीपी मोहंती करेंगे।
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