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गायन, वादन और नृत्य की बही त्रिवेणी

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वाराणसी। गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी में गुरुवार की रात संगीत रसिकों ने खूब गोता लगाया। सितार के तारों संग तन, मन झंकृत हुए तो सुरों की अलापचारी ने वातावरण को रससिक्त कर दिया। कथक नृत्य पर पारंपकि बंदिशों की थिरकन पर लोग मंत्रमुग्ध हो उठे। श्रीमठ संगीत समारोह की दूसरी निशा ऐसे ही भावों के साथ लोगों की स्मृतियों में रच बस गई।
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नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में दीप प्रज्ज्वलन के बाद शुरुआत हुई प्रो कृष्णा चक्रवर्ती के सितार वादन से। उन्होंने सितार पर राग नंद कौंस की अवतारणा की। मालकौंस और राग जोग से मिलकर निर्मित राग की शुरुआत हुई आलापचारी से। इसके उपरांत विलंबित तीनताल में निबद्ध गत की मनोहारी प्रस्तुति रही। द्रुत एकताल में निबद्ध गत बजाकर उन्होंने विराम लिया। तबले पर संगत की पं कुबेर मिश्र ने। तानपूरे पर साथ दिया डॉ संजय वर्मा ने। इनके बाद मुंबई से पधारे उस्ताद मकबूल हुसैन खान एवं उनके पुत्र जीशान खान का गायन हुआ। राग मेघ में मध्य झपताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे -गरजे घटा गहन...। इसके उपरांत तीनताल में बंदिश सुनाकर उन्होंने वातावरण को सुरों से सराबोर कर दिया। इसके बाद दूसरी बंदिश- आवे रे बदरा कारे... की प्रस्तुति की। फिर राग रागेश्री कौंस में मध्य तीनताल में निबद्ध बंदिश सुनाया बोल थे- सुंदर बलमा ...। ठुमरी के बाद राग अहिरी तोड़ी में निबद्ध भजन -राम का गुणगान करिए...की प्रस्तुति के बाद इन्होंने विदा ली। तबले पर संगत की पं. सुधीर पांडेय ने।
अंत में बीएचयू मंच कला संकाय के नृत्य विभाग की अध्यक्ष प्रो. विधि नागर और उनकी शिष्याओं ने कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति की।तबले पर अमित ईश्वर, आनंद मिश्र, पखावज पर आदित्य दीप, सितार पर हार्दिक बर्मा और बांसुरी पर शनीश ज्ञावली ने संगत की। संचालन प्रीतेश आचार्य ने किया।
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गुरु नानकदेव के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में प्रभात फेरी आरंभ
वाराणसी। सिख पंथ के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में महीने भर चलने वाली प्रभात फेरी गुरुवार को आरंभ हो गई। गुरुवाणी पर शबद-कीर्तन करते हुए बच्चे, महिलाएं और पुरुष भोर में घरों से निकले। एक प्रभात फेरी लाजपत नगर से और दूसरी आस भैरव नीचीबाग से निकाली गई। गुरुद्वार गुरुबाग पहुंचने पर प्रभात फेरियों का स्वागत पुष्पवर्षा से किया गया।
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