सड़क बनाने के चक्कर में 159 फायर हाइड्रेंट (अग्निशमन बम्बा) दब गए हैं। वहीं, जलकल की ओर से अभी फायर हाइड्रेंट का सर्वे चल रहा है। दीपावली पर्व पर आग लगने की घटनाएं हुईं तो दमकलकर्मियों को पानी के लिए फायर हाइड्रेंट खोजे नहीं मिलेंगे।
शहर में पहले यहां 327 फायर हाइड्रेंट थे, अब मात्र 168 फायर हाइड्रेंट बचे हैं। बाकी के बारे में जलकल को पता नहीं है। शहर के प्रमुख चौराहों, ओवरहेड टैंकों और महत्वपूर्ण स्थानों पर फायर हाइड्रेंट होते थे। लंका, भिखारीपुर, लहरतारा, गोदौलिया, गिरजाघर, लहुराबीर, सारनाथ, पांडेयपुर, नई सड़क, बेनियाबाग, नदेसर, मैदागिन आदि इलाकों में सड़क बनाने के दौरान इन फायर हाइड्रेंट को नीचे दबा दिया गया है। शहर में आपातकालीन स्थिति में पानी की आपूर्ति करने वाले अधिकतर हाइड्रेंट अपना अस्तित्व खो चुके हैं। कुछ सड़क के नीचे दब गए तो कुछ में पानी का प्रेशर नहीं है। इन फायर हाइड्रेंट को सही कराने के लिए दमकल विभाग की ओर से जलकल को पत्र लिखा जा चुका है। बावजूद व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई है। यही कारण है कि दमकल विभाग के वाहन फैक्ट्रियों, अपार्टमेंट, व्यवसायिक भवनों से पानी लेने को मजबूर हैं। इससे समय की बर्बादी होती है। आग बुझाने के उपकरण तो दमकल विभाग के पास हैं, लेकिन फायर हाइड्रेंट की कमी से उन्हें आपात स्थिति में पानी खींचने में दिक्कत उठानी पड़ती है।
20.83 लाख शहर की जनसंख्या
168 बड़े नलकूपों की संख्या
133 छोटे नलकूपों की संख्या (यहां से फायर हाइड्रेंट गायब)
1500 किमी पाइप लाइन की लंबाई
110 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की आपूर्ति
278 एमएलडी पानी की उपलब्धता
348 उत्पादित पेयजल
फायर हाइड्रेंट को दुरुस्त कराने के लिए सर्वे हो रहा है। इस समय केवल बड़े नलकूपों में फायर हाइड्रेट लगे हैं। पहले छोटे नलकूपों और सड़क किनारे चौराहों पर फायर हाइड्रेंट होते थे। वहां बड़ी गाडिय़ों की पहुंच न होने से वहां फायर हाइड्रेंट सक्रिय नहीं हैं। -सिद्धार्थ कुमार, सचिव, जलकल