वाराणसी। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में दलालों का वर्चस्व काफी समय से है। इसके अलावा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) हर दिन घूमते नजर आते हैं। जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रहती है, वह डॉक्टर को दिखाने का इंतजार करते हैं लेकिन एमआर सीधे डॉक्टर के पास पहुंच जाते हैं। इसके अलावा दलालों का जो सिंडिकेट है वह भी मरीजों को बेहतर इलाज का प्रलोभन देकर प्राइवेट अस्पतालों में ले जाते हैं। ऐसा नहीं कि उनको ओपीडी में कोई देखता नहीं है, डॉक्टर के साथ कर्मचारी भी यहीं रहते हैं लेकिन कोई उन्हें टोकता नहीं है।
सरकारी अस्पतालों में सभी दवाइयां अस्पताल से ही दिए जाने का नियम है और किसी कीमत पर बाहरी दवाइयां नहीं लिखनी हैं और न बाहर से मंगायी जानी हैं। बाहर की दवाइयां लिखे जाने की शिकायतें भी मरीज और उनके परिजन समय-समय पर अधिकारियों से करते हैं। बावजूद इसके समस्या दूर नहीं हो पा रही है। वैसे तो एमआर दीनदयाल अस्पताल, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा और रामनगर अस्पताल, जिला महिला अस्पताल सभी जगहों की ओपीडी में घूमते मिल जाएंगे लेकिन सबसे खराब स्थिति इन दिनों महिला अस्पताल की है।