वाराणसी। महमूरगंज स्थित नर्सिंगहोम में नौ दिन के बच्चे की जान बचाने के लिए मंगलवार आधी रात खून की जरूरत पड़ी। बिहार से आए परिजन रक्तदाता की तलाश में लहुराबीर-चेतगंज मार्ग पर भटक रहे थे कि चेतगंज पुलिस टकरा गई। पूछताछ में पुलिस को परिजनों ने परेशानी बताई तो चेतगंज थाने में तैनात सिपाही राकेश सरोज ने रात करीब 2:30 बजे आईएमए जाकर रक्तदान किया। इससे गदगद परिजन राकेश को कभी फरिश्ता तो कभी गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताते रहे।
बिहार के नासरीगंज हरिहरगंज निवासी मोहम्मद अशरफ हुसैन ने बताया कि उनके छोटे भाई की पत्नी ने नौ दिन पहले बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे की तबीयत ज्यादा खराब हुई तो उसे सासाराम से रेफर कराकर मंगलवार को महमूरगंज स्थित नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे को खून चढ़ाना बेहद जरूरी है तो वह भाग कर रात करीब दो बजे लहुराबीर स्थित आईएमए के ब्लड बैंक गए, लेकिन बीमारी के कारण उनका खून लेने से इंकार कर दिया गया। उनके साथ न तो परिवार का कोई अन्य सदस्य था और न ही ऐसा कोई रिश्तेदार जो यहां आकर खून दे सकता। वह ब्लड बैंक से निकल कर सड़क पर घूम रहे थे कि इसी बीच सादे कपड़ों में मौजूद एक दरोगा ने उन्हें आवाज दी। अशरफ ने आंसू पोंछते हुए दरोगा को परेशानी बताई तो उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया। रात करीब 2:30 बजे सिपाही राकेश सरोज ने आकर रक्तदान किया। अशरफ ने कहा कि जब वह खुद और रिश्तेदार भी काम नहीं आए तो राकेश बच्चे के लिए फरिश्ता बनकर आए। वह राकेश को उम्र भर याद रखेंगे। पुलिस कैसी होती है, यह सबको बताएंगे।
राकेश घोषित किए जाएंगे सर्वश्रेष्ठ आरक्षी
सोशल मीडिया पर राकेश की सराहना हुई तो विभागीय अधिकारियों को भी इसकी जानकारी हुई। सीओ चेतगंज अंकिता सिंह और इंस्पेक्टर चेतगंज प्रवीण कुमार ने राकेश को बुके देकर सम्मानित किया। सीओ चेतगंज ने बताया कि एक दिन की विशेष छुट्टी देने के साथ ही राकेश को महीने का सर्वश्रेष्ठ आरक्षी घोषित किया जाएगा। ड्यूटी के अलावा सामाजिक सरोकार के प्रति राकेश ने जो संवेदनशीलता दिखाई, इसके लिए उन्हें उच्चाधिकारियों से भी पुरस्कृत कराया जाएगा।