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वन्य जीव के लिए पेय जल का संकट

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चकिया। काशी वन्य जीव प्रभाग के चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार में भीषण गर्मी के कारण प्राकृतिक एवं कृत्रिम जल स्रोतों के सूखने का क्रम तेज हो गया है। चंद्रप्रभा बांध में भी बहुत कम पानी बचा है। थोड़ा बहुत पानी वन्य जीवों के लिए सुरक्षित है तो वन विभाग द्वारा वन्य जीवों के लिए बनाए गए पेयजल सिस्टम भी सूख गये हैं। हालत यह है कि वाटर होल्स में टैंकरों के जरिए पानी भरा जा रहा है।
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चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार में मौजूद चंद्रप्रभा बांध में पानी है लेकिन पानी के आस-पास दलदल है। इससे वन्य जीव बांध में पानी पीने से कतरा रहे हैं। वहीं वन विभाग द्वारा निर्मित बलियारी पोखरे में भी पानी है वहां भी दलदली क्षेत्र वन्य जीवों के लिए खतरनाक बन गया है। वन्य जीवों के पेयजल की व्यवस्था के लिए वन विभाग द्वारा पूरे वन्य जीव बिहार में 15 चेकडैम तथा 25 वाटर होल्स बनाए गए हैं। इसमें से चार वाटर होल्स तो इसी साल बने हैं। चेकडैमो में कही-कही थोड़ा बहुत पानी है लेकिन यह पानी वन्य जीवों के लिए नाकाफी है। वाटर होल्स पूरी तरह सूख गए हैं। इन वाटर होल्स में टैंकरों के जरिए वन विभाग द्वारा पानी छोड़ा जा रहा है। धुसुरिया तथा गेरूअहवा में स्थिति वाटर होल्स में पानी टैंकरों द्वारा छोड़े जा रहे हैं। वन क्षेत्र में पानी की कमी के कारण वन्य जीव पेयजल के लिए वन क्षेत्र से सटे गांवों की ओर आ रहे हैं। चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार के रेंजर बृजेश पांडेय ने बताया कि अन्य क्षेत्रों की तरह वन्य जीव बिहार में भी वन्य जीवों के लिए पानी की किल्लत है, लेकिन इस किल्लत को पूरा करने के लिए वन विभाग टैंकरों के जरिए पानी वाटर होल्स तथा चेकडैमों में पहुंचा रहा है।
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