वाराणसी। हाथों में कमाल का हुनर। काबिलियत भी बेजोड़। बीएचयू दृश्य कला संकाय के छात्र राकेश और अंजूलता के हुनर के मुरीद केवल सहपाठी ही नहीं, बल्कि विभाग के शिक्षक भी हैं। राकेश इंब्रायडरी में माहिर हैं तो अंजूलता इतनी बारीकी से साड़ी डिजाइन करती हैं कि जो एक बार देखता है, वह देखते रह जाता है। शनिवार के हादसे में दोनों के हाथों में फ्रैक्चर हो गए। चिकित्सकों का कहना है कि चोट ठीक होने में करीब छह महीने लग जाएंगे, इसके बाद ही वह कोई काम करने लायक होंगे।
राकेश टेक्सटाइल डिजाइनिंग (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) चतुर्थ वर्ष के छात्र हैं। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वहीं अंजूलता भी (बीएफए) चतुर्थ की छात्रा हैं। इसके बावजूद उनका जुनून देखने लायक है। अंजू की टेक्सटाइल डिजाइनिंग इतनी बेहतर है कि देखने से लगता है जैसे वह किसी मशीन से की गई हो। बीएफए चतुर्थ वर्ष की परीक्षा देने के बाद राकेश और अंजूलता ने एमएफए (मास्टर आफ फाइन आर्ट्स) में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा दी है। वह नोड्यूज के लिए संकाय से सेंट्रल ऑफिस की ओर जा रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।
आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण राकेश की फीस उसके साथ पढ़ने वाली एक छात्रा ने भरी, जबकि हॉस्टल का खर्च शिक्षिका ने उठाया। वहीं, अंजूलता पैरों से दिव्यांग हैं। त्रिवेणी हॉस्टल से संकाय पहुंचने पर तुरंत डिजाइनिंग के काम में लग जाती हैं। हादसे में उनके दाहिने हाथ में ही फ्रैक्चर हो गया। टेक्सटाइल विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जसविंदर कौर के अनुसार, दोनों छात्रों के हुनर के मुरीद सभी लोग हैं। अंजूलता ने दिव्यांगता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। विभाग आने के बाद वह शाम तक काम में लगी रहती थी। राकेश की कला का भी कोई जवाब नहीं है।