वाराणसी। काशी विश्वनाथ धाम के लिए खरीदे जा रहे भवनों में 17 ऐसी संपत्तियां हैं, जिनका अब भी सौदा नहीं हो पाया है। ये भवन मंदिर प्रशासन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। हालांकि, प्रशासन इन भवनों को लेने की कोशिश कर रहा है और इस माह के अंत तक सभी की रजिस्ट्री होने की संभावना है।
काशी विश्वनाथ मंदिर से मणिकर्णिका घाट, मीर घाट और मंदिर तक करीब 40 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बनने वाले काशी विश्वनाथ धाम के लिए मंदिर प्रशासन ने दो मोहल्लों के 297 भवनों को चिह्नित किया था। इसमें निजी व सरकारी संपत्तियों के अलावा ट्रस्ट और सेवइत की संपत्तियां शामिल हैं। मंदिर प्रशासन अब तक 280 भवन खरीद चुका है और इसके लिए लगभग 240 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया। इन्हें ढहाने का काम भी पूरा हो चुका है। इनका मलबा हटवाया जा रहा है, लेकिन अभी 17 ऐसी संपत्तियां हैं, जिनका सौदा नहीं हो पाया है। इनमें प्रमुख निर्मल मठ, जूना अखाड़ा और बंगाली ट्रस्ट के अलावा कुछ निजी संपत्तियां है। कुछ संपत्तियों के मालिक चार गुना से भी अधिक कीमत मांग कर रहे हैं, जबकि आधा दर्जन संपत्तियां न्यायालय में विचाराधीन हैं।
शासन स्तर से भी चल रही वार्ता
धार्मिक भवनों और ट्रस्टों के लिए शासन स्तर से भी वार्ता चल रही है। सूत्रों की माने तो निर्मल मठ और जूना अखाड़ा के संतों से मुख्यमंत्री भी वार्ता करने की बात कह रहे हैं, इसलिए इन दोनों भवनों का जल्द ही हल निकलने की उम्मीद है। अन्य भवन स्वामियों से अधिकारी वार्ता कर रहे हैं। माना जा रहा है कि 15 जून के बाद इन संपत्तियों की रजिस्ट्री हो जाएगी।