वाराणसी। सुगम यातायात के प्रयास में जुटा प्रशासन गंगा और वरुणा में जल परिवहन के लिए सर्वे कराएगा। फिजिबिलिटी रिपोर्ट के बाद नाविकों को अत्याधुनिक नावों के जरिए जोड़ा जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने योजना तैयार कर शहरी विकास मंत्रालय को संस्तुति के लिए भेजा जाएगा। विशेष आयोजनों पर किए गए ट्रायल को भी रिपोर्ट में शामिल किया जा रहा है।
सड़कों पर लगने वाले जाम से निपटने के लिए प्रशासन यातायात के वैकल्पिक संसाधनों को विकसित करना चाहता है। गंगा और वरुणा में जल परिवहन के लिए योजना बनाई जा रही है। इसमें नावों को सीएनजी इंजन के लगाया जाएगा और स्थानीय नाविकों को भी रोजगार के लिए जोड़ा जाएगा। गंगा में राजघाट से दशाश्वमेध तक जल परिवहन के लिए प्रमुख घाटों पर जेट्टी बनाने और दोनों घाटों पर सीएनजी पंप भी लगाया जाएगा। ऐसे ही वरुणा में भी वाटर ट्रांसपोर्ट की शुरुआत करने की योजना है। यहां बता दें कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन और सावन मेले के दौरान काशी विश्वनाथ दर्शन के लिए अस्सी और राजघाट से दशाश्वमेध घाट तक जल परिवहन का ट्रायल किया गया था। उस दौरान वीआईपी को मंदिर तक पहुंचाने के लिए इस मार्ग का उपयोग किया गया था। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि वाटर ट्रांसपोर्ट के लिए सर्वे का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन से संस्तुति मिलने के बाद सर्वे कराया जाएगा और उसकी रिपोर्ट के आधार पर योजना को अंतिम रुप दिया जाएगा। इसके लिए शहर के अलग अलग वर्गो से भी सलाह मांगी गई है।
एक नजर जल परिवहन
- राजघाट से अस्सी घाट तक सात किलोमीटर का रुट
- दो हजार से ज्यादा नावों का संचालन गंगा में होता है
- वरुणा में कैंट से राजघाट तक 10.3 किलोमीटर का रूट