वाराणसी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की निलंबित परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार और प्रिंटिंग प्रेस के मालिक कोलकाता निवासी कौशिक कुमार से अब जेल में पूछताछ होगी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रामचंद्र की अदालत ने विवेचक को इसकी अनुमति दे दी है।
उधर, बचाव पक्ष की दलील थी कि एक आरोपी के बयान के आधार पर एक उच्चाधिकारी को फंसाया गया है, जबकि वह निर्दोष है। उन्होंने अपना कार्य निष्ठापूर्वक किया। सर्च वारंट के बाद भी तलाशी के दौरान नगदी या कोई अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य नहीं मिला। एक आरोपी के बयान पर किसी को आरोपी बनाया जाना न्यायोचित नहीं है। अंजू के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उन्हें आरोपी बनाया जा सके। अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया।
अभियोजन के मुताबिक, कोलकाता निवासी अशोक देव चौधरी के आवेदन पर एसटीएफ लखनऊ के निरीक्षक विजेंद्र शर्मा ने 28 मई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अशोक ने सूचना दी थी कि 28 जुलाई 2018 को आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के दो विषयों का पेपर आउट कराया गया था। 50 अभ्यर्थियों को बनारस बुलाया गया और रुपये लेकर प्रश्न पत्र हल कराए गए थे। सूचना पर एसटीएफ ने काम किया और कोलकाता निवासी प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार को कैंट थाना अंतर्गत होटल इंडिया के पास से गिरफ्तार किया। कौशिक के कब्जे से आयोग से संबंधित दस्तावेज और भावी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नपत्र बरामद किए गए थे। कौशिक द्वारा अपराध में अंजू कटिया की संलिप्तता बताए जाने पर उसे प्रयागराज से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर आउट कराने के बदले में अंजू कटियार को 26 मई 2019 को कौशिक ने प्रयागराज में 10 लाख रुपये दिए। अभियोजन के अनुसार इसकी पुष्टि कौशिक के मोबाइल की कॉल डिटेल और उसके बयान से हुई। साथ ही व्हाट्सऐप चैटिंग से पता लगा कि कौशिक से अशोक देव चौधरी के बारे में अंजू पूछ रही थी।