वाराणसी। बीएचयू में पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में पांच शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता की पुष्टि के बाद अब इस मामले में कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पहले आरटीआई मांगी गई, इसके बाद आरटीआई में मिले कागजात से गड़बड़ी की पुष्टि हुई तब नियुक्ति प्रक्रि या पर सवाल खड़ा करते हुए पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई। यहां से न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट में याचिका दायर कर लोगों ने न्याय की गुहार लगाई गई। इसमें सबसे अधिक गड़बड़ियां विज्ञान संस्थान में ही मिली थीं। कोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कलीमुल्लाह खान की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर जांच शुरू कराई। जांच में जिन पांच लोगों की नियुक्ति में गड़बड़ी मिली है, उसमें भौतिकी विभाग से दो प्रोफेसर, जुलॉजी से एक प्रोफेसर और इसी विभाग से एक एसोसिएट प्रोफेसर के साथ ही केमिस्ट्री के एक एसोसिएट प्रोफेसर का नाम शामिल है। इसी महीने 8 मई को कुलसचिव कार्यालय की ओर से ज्वाइंट रजिस्ट्रार एडमिन-टीचिंग ने सभी को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा था। सूत्रों की माने तो अब सभी ने अपना-अपना जवाब सीलबंद लिफाफे में दे दिए है।
जिन पांच शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, इसमें नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, जाली सर्टिफिकेट लगाया जाना, एपीआई स्कोर के जोड़ में गड़बड़ी, शोध कराने वाले छात्रों के बारे में गलत जानकारी देने का मामला पकड़ में आया है। जांच कमेटी ने नियुक्ति प्रक्रिया के लिए बनी कमेटी की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया है।