वाराणसी। तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी का बनारस से गहरा रिश्ता था। वह कई बार काशी आए थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जब वाराणसी आए थे तो बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने ही पहली बार हॉट मिक्स प्लांट से सड़कों का निर्माण कराया था। पूर्वांचल के विकास पर उनका खास ध्यान था। वाराणसी में पिंडरा क्षेत्र में करखियांव और जौनपुर के सतहरिया में औद्योगिक आस्थान की स्थापना उनकी परिकल्पना का ही परिणाम है।
तिवारी के नजदीकी रहे लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद के पूर्व सदस्य मणिशंकर पांडेय का कहना है कि सामने घाट पर बनने वाला बंधा भी उन्हीं के मुख्यमंत्रित्वकाल में शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि 1989 में तिवारी ने जौनपुर को इंडिस्ट्रयल जिला घोषित किया था। तय हुआ था कि यहां कारोबार शुरू करने वालों से सात साल तक टैक्स और बैंक से कर्ज लेने वालों से ब्याज नहीं लिया जाएगा।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के पूर्व राष्ट्रीय सचिव रत्नाकर त्रिपाठी उन्हें याद करते हुए बताते हैं कि बतौर मुख्यमंत्री उनसे 30 से अधिक बार मुलाकात हुई थी। वे सभी को महाराज जी कहते थे। कभी किसी पर गुस्सा करते नहीं देखा। हम लोग गुस्साते थे तो कहते थे दिमाग ठंडा रखो। कार्यकर्ता हो या मंत्री रात बारह बजे भी उसी भाव से मिलते थे। किसी में भेद नहीं करते थे। कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि वह कर्मयोगी थे। उनके कार्यकाल में यूपी का काफी विकास हुआ है। उन्हीं के रुके कार्यों को बाकी की सरकारों ने आगे बढ़ाया।
विद्यापीठ में प्रोफेसर थे भाई रमेश तिवारी
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में एनडी तिवारी के भाई रमेश चंद्र तिवारी प्रोफेसर थे। मुख्यमंत्री रहते हुए वह कई बार उनके घर आए थे। विद्यापीठ के प्रो. सतीश राय बताते हैं कि समाजशास्त्र के प्रोफेसर रहे तिवारी में इस बात का बिल्कुल भी अहम नहीं था कि वह मुख्यमंत्री के भाई है। उनके आवास पर टेलीफोन इसीलिए लगाया गया था क्योंकि उनके भाई एनडी तिवारी को उनसे बात करनी रहती थी। विद्यापीठ में कांग्रेस के एक अधिवेशन में भी तिवारी ने शिरकत की थी। वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य ने बताया कि तिवारी का जंगमबाड़ी मठ से काफी लगाव था। यहां दर्शन-पूजन के लिए वह प्राय: आते थे।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखा
तिवारी के निधन पर जिला और महानगर कांग्रेस कमेटी की ओर से मैदागिन स्थित कार्यालय में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर राजीव गांधी स्टडी सर्कल के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. सतीश कुमार राय, अध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, सीताराम केसरी, पूर्व विधायक अजय राय, शिवशंकर मौर्य, दिग्विजय सिंह, देवेंद्र सिंह, डा. हर्षवर्धन सिंह, आनंद सिंह, कल्पनाथ शर्मा, शैलेंद्र सिंह, नृपेंद्र नारायण सिंह आदि उपस्थित रहे।