फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सो परनारि लिलार गोसाई

विज्ञापन
विज्ञापन
रामनगर। जो मनुष्य अपना कल्याण, यश, सुबुद्धि, शुभ गति और नाना प्रकार के सुख चाहता हो, वह हे स्वामी! परस्त्री को चौथ के चंद्रमा की तरह त्याग दे। विभीषण ने विनम्र वाणी से नीति बखान करते हुए यह राय दी तो रावण क्रोधित हो उठा। उसने लात मारकर विभीषण को दरबार से निकाल दिया।
विज्ञापन

रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में शनिवार को भगवान राम की वानर सेना के समुद्र तट पर पहुंचने, रावण दरबार, विभीषण का राम की शरण में आने और सिंधु तट पर शिवलिंग की स्थापना की लीला हुई। अधिकतर मंचन लंका क्षेत्र में हुआ। वीर वानरी सेना श्रीराम की जय जयकार करते हुए समुद्र तट पर पहुंचती है। यह समाचार जब रावण को उसका दूत सुनाता है तो वह मंत्रियों से सलाह मांगता है। उसी समय विभीषण दरबार में पहुंचते हैं। वह बड़े भाई को समझाते हैं कि राम से बैर ठानना उचित नहीं है। यह सुनकर रावण क्रोध में भरकर भाई को लात मारकर निकाल देता है। विभीषण तब राम की शरण में चले जाते हैं। भगवान राम उनसे समुद्र को पार करने का उपाय पूछते हैं। विभीषण कहते हैं समुद्र आपके कुल के बड़े हैं, उनसे विनती करें, वे ही उपाय बताएंगे। प्रार्थना पर भी जब समुद्र प्रकट नहीं होते तो राम अग्निवाण उठाते हैं, यह देखकर विभिषण प्रकट होता है और क्षमा मांगते हुए नल और नील को बचपन में मिले आशीर्वाद के बारे में बताता है। उसके बाद सेतु निर्माण शुरू हो जाता है। भगवान राम इस रमणीक भूमि पर भगवान शिव की स्थापना करते हैं। यहीं भगवान की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें