ज्ञानपुर। घंटे के नाद के साथ शांति का संदेश देने वाली मां चंद्रघंटा की उपासना के लिए मंगलवार को देवी मंदिरों पर आस्थावानों की कतारें लगी रहीं। सुबह से लेकर देर रात तक मंदिरों में दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान जयकारे और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय होता रहा। हरिहरनाथ धाम देवी मंदिर, घोपइला धाम, सीतामढ़ी आदि देवी मंदिरों पर हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर जगत जननी से लोक कल्याण के निमित्त प्रार्थना की।
देवी आराधना के पवित्र पर्व वासंतिक नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को घर-घर आदिशक्ति के चंद्रघंटा स्वरूप की उपासना की गई। हाथ में घंटा और मस्तक पर चंद्रमा होने के नाते भगवती के इस स्वरूप को चंद्रघंटा कहा जाता है। जगत कल्याण के लिए आदिशक्ति का यह स्वरूप नाद के साथ शांति का संदेश देता है। इस मौके पर जिले के देवी मंदिर श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरे दिन गुलजार रहे। ज्ञानपुर नगर स्थित हरिहरनाथ धाम स्थित देवी मंदिरों पर भोर में पांच बजे से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने और दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। देर शाम तक श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना में लीन रहे। घोपइला देवी धाम में तकरीबन 10 हजार श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। इस दौरान हवन-पूजन और देवी गीत गाते हुए महिला श्रद्धालु मंदिर पर पहुंचीं। इसी तरह सीतामढ़ी स्थित सीता मंदिर और गोपीगंज, भदोही नगरों के देवी मंदिरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। नवरात्र में घर-घर कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती पाठ चल रहा है। कोना-कोना देवीभक्ति में रमा नजर आया। सुबह-शाम शक्ति की भक्ति चरम पर दिखाई पड़ती है।