फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानवीय हित को समेटे हुए हैं गंगा या कुंडों में स्नान

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। काशी के विविध व विशिष्ट पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, जन सामान्य में इसके प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से ‘काशी-विमर्श’ नाम से एक व्याख्यान श्रृंखला चल रही है। क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, उ.प्र.राज्य पुरातत्व विभाग, पिलग्रिम्स पब्लिशिंग तथा इंटेक वाराणसी अध्याय के सह-संयोजन में चल रहे कार्यक्रम में रविवार को पिलग्रिम्स बुक हाउस में ‘काशी के प्रमुख स्नान एवं उनका महत्व’ विषयक व्याख्यान आयोजित किया गया।
विज्ञापन

रंगकर्मी, अभिनेता व छायाचित्रकार नारायण द्रविड़ ने काशी में प्रमुख तिथियों व पर्व-त्योहारों पर होने वाले प्रमुख स्नानों की धार्मिक मान्यता व महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गंगा तथा काशी के अनेक कुंड-तालाब पर स्नान भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक परंपरा के साथ मानव के दैहिक, मानसिक शुचिता के द्योतक हैं। यह अपने साथ मानवीय हित की परंपरा को समेटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्नान अपने साथ अनेक धार्मिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक प्रतीकों को सहेजते हुए जनमानस के जीवन को सफल बनाने का माध्यम है। गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि भारतीय सांस्कृतिक समृद्धि व निरंतरता की सरिता है। इस अवसर पर आचार्य कमलेश दत्त त्रिपाठी, डॉ. विजय शंकर शुक्ल, पंडित हरिराम द्विवेदी, प्रो. एससी लखोटिया, प्रो. एमएनपी तिवारी, प्रो. दुर्गा नंदन तिवारी, नलिन गुलाटी, डॉ. शांति स्वरुप सिन्हा, डॉ. सुशील कुमार, विनय कूल, डॉ. अवधेश दीक्षित, डॉ.आरती कुमारी, डॉ. सुजीत कुमार चौबे, अरविंद कुमार मिश्र, बलराम यादव, अर्चना सिंह, सरिता लखोटिया, ब्रज किशोर अग्रवाल, डॉ. डीपी सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
अतिथियों का स्वागत पिलग्रिम्स बुक हाउस के रामानंद तिवारी तथा व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य प्रकाश अशोक कपूर व धन्यवाद ज्ञापन क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने किया। कार्यक्रम का संचालन ज्योति सिंह ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें