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महिलाएं आत्मनिर्भर होने लगीं, युवाओं का भी हो भला

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वाराणसी। तीन साल पहले तक जयापुर गांव को जाने वाला रास्ता ऊबड़-खाबड़ था मगर अब सूरत बदल चुकी है। गांव में संचालित सिलाई और चरखा केंद्र के माध्यम से 85 महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था की गई है। युवतियां ब्यूटीशियन इत्यादि के कोर्स करके खुद की बेहतरी के लिए लगी हुई हैं। फिलहाल यह केंद्र कन्या विद्यालय के प्रांगण में छोटी सी जगह में चल रहा है। केंद्र संचालिका अमृता राय कहती हैं कि ज्यादा महिलाओं को लाभान्वित करने के लिए अलग से भवन बनाने की जरूरत है।
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राजातालाब-जक्खिनी मार्ग पर स्थित गांव के प्रवेश द्वार के समीप पान की दुकान लगाने वाले बुजुर्ग मिट्ठू राम कहते हैं कि बीते ढाई साल में इतनी गाड़ियां, नेता-मंत्री, मीडिया और अधिकारी देखे, जितनी जिंदगी के 62 साल में नहीं देखे थे। वह मानते हैं कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश जरूर हुई लेकिन गांव के लड़कों के लिए रोजी-रोटी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हुई। वह तो यहां तक कहते हैं-जो काम हुए, वह कच्चे निकले, मसलन शौचालय बने मगर ज्यादातर बेकार निकले, सोलर लाइट खराब हो गईं। मोदी जी कहते हैं कि जो काम हो ठोस हो तो वह दिखना भी चाहिए ना...।
दूसरी ओर ग्राम प्रधान नारायण पटेल कहते हैं कि जल निकासी, गलियों की मरम्मत, अस्पताल और स्कूल गांव के लिए जरूरी है और व्यवस्था होनी चाहिए। शौचालय हैं। फिर भी कई लोग घर के बाहर ही जाते हैं। गहरी सांस लेते हुए पटेल कहते हैं कि ग्रामीणों ने मिली सुविधाओं को सहेज कर रखने में जागरूकता नहीं दिखाई। 135 स्ट्रीट लाइट लगी थी लेकिन 70 से ज्यादा की बैट्री चोरी हो गई। ग्रामीण सजग रहते तो ऐसा न होता।
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अटल नगर जाने को न रास्ता और न बिजली की व्यवस्था
जयापुर में वनवासियों को रहने के लिए 14 मकानों का अटल नगर बनवाया गया। यहां जाने के लिए मुकम्मल रास्ता नहीं है। सोलर स्ट्रीट लाइट खराब हो चुकी हैं। जित्तू वनवासी कहते हैं कि हम अभी तक परंपरागत पेशे में ही हैं। कुछ ऐसी व्यवस्था होती कि हमारी आगे की पीढ़ी पढ़-लिख कर अपना जीवन संवारती और हमें दो रोटी इज्जत के साथ कमाने का मौका मिलता।
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