बीएचयू में भारतीय ज्ञान परंपरा और पं. दीन दयाल उपाध्याय के चिंतन पर 150 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अशोक उपाध्याय ने कहा कि किसी भी सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत आत्म-चिंतन होती है। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस और भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एनपी सिंह ने संवाद और प्रश्न पूछने के महत्व को बताया। लीडेन विश्वविद्यालय, नीदरलैंड के प्रो. प्रलय कानूंगो ने ज्ञान, शक्ति और सभ्यता के संबंधों पर विचार किया। सम्मेलन की रिपोर्ट राजनीति विज्ञान विभाग की शोधार्थी प्रिया खराड़ी ने प्रस्तुत की। पंडित दीनदयाल उपाध्याय चेयर के समन्वयक प्रो. तेज प्रताप सिंह ने भारत की विविधता पर आधारित एकात्म मानववाद की अवधारणा को बताया।