गाजीपुर। जिले के निजी चिकित्सक अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को हड़ताल पर रहे। इसके चलते कई मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सिर्फ वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने का काम किया गया। निजी चिकित्सकों की हड़ताल को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में पुख्ता इंतजाम किया था।
देश में समान क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट लागू करने, नेशनल मेडिकल एसोसिएशन को निरस्त करने सहित सात सूत्री मांगों को लेकर निजी चिकित्सकों के हड़ताल पर रहने से ओपीडी की सेवाएं पूरी तरह से ठप रही। ओपीडी बंद रहने के चलते दूर-दराज से आए मरीजों और परिजनों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। आईएएम के जिला इकाई के उपाध्यक्ष और सिंह मेडिकल अस्पताल के प्रबंधक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से लागू की जा रही इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के लागू हो जाने से स्वास्थ्य सेवाएं कारपोरेट के हाथों में चली जाएगी। इससे चिकित्सकीय उपचार काफी बढ़ जाएगा और आर्थिक रुप से कमजोर लोग अपना इलाज नहीं करा पाएंगे। इस एक्ट के चलते निजी चिकित्सकों को और मरीजों को काफी दिक्कत होगी। उन्होंने बताया कि सीसीपीएनडी एक्ट में बदलाव की भी मांग की गई। सात सूत्री मांगों के समर्थन में जनपद से डॉ. रजनी राय और डॉ. राजेश रैली में भाग लेने दिल्ली गए हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह पहला मौका होगा आज पूरे देश के चिकित्सक अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर दिल्ली में एकत्र हुए हैं। कहा कि सरकार की ओर से लागू किए जा रहे एक्ट के चलते डॉक्टरों को हेल्थ सेक्टर में काफी दिक्कत उठानी पड़ेगी। संगठन के निर्देश पर जनपद के सभी निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। ओपीडी बंद रही, जबकि पहले से वार्डों में भर्ती मरीजों का इलाज किया गया। इस संबंध सीएमओ डॉ. जनार्दनमणि त्रिपाठी ने बताया कि निजी चिकित्सकों के हड़ताल पर रहने के चलते सरकारी अस्पतालों में मरीजों के बढ़ने की दशा में दवा की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। ऐसे प्रत्येक दिन की तरह ही मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे।