वाराणसी। पाहन पूजे हरि मिलैं तो मैं पूजूं पहाड़....और साईं इतना दीजिए जामें कुटुंब समाय..जैसी पंक्तियों से समाज में व्याप्त अंधविश्वास के खिलाफ अलख जगाने वाले संत कबीर की जन्मस्थली पर मंगलवार से तीन दिवसीय आस्था का मेला लगेगा। देश के कोने-कोने से कबीरपंथियों के लहरतारा पहुंचने का सिलसिला सोमवार को ही शुरू हो गया। देर रात तक हजारों की तादाद में अनुयायी पहुंच चुके थे। एकतारा, खझड़ी पर कबीरपंथियों के झूमने, थिरकने का सिलसिला आरंभ हो गया है।
लहरतारा तालाब में कभी कमलिनी नाल पर बाल रूप में कबीर नीरू-नीमा नामक जुलाहा दंपती को मिले थे। दंतकथाओं के अनुसार नीरू-नीमा ने तालाब से बालक को निकालकर पुत्र के रूप में पालन-पोषण किया था। दुनिया को कर्म की प्रधानता का संदेश देने वाले संत कबीर की जयंती पर उनके प्राकट्य स्थल लहरतारा में तीन दिवसीय मेले की शुरुआत आचार्य अर्धनाम साहेब ध्वजारोहण के साथ मंगलवार की सुबह करेंगे। इसके लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। हजारों की तादाद में कबीर के अनुयायी हजूरी पंजे के साथ काशी पहुंच गए हैं। तालाब और प्राकट्यधाम में भजनों, पदों का गायन शुरू हो गया है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ के अलावा कई देशों से एनआरआई अनुयायी भी पहुंच गए हैं।