वाराणसी। तुलसी घाट पर चल रहे चार दिवसीय ध्रुपद मेले के द्वितीय चरण में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर सभी को आनंदित कर दिया। द्वितीय चरण का शुभारंभ मैहर घराने के उस्ताद आशीष खान के शिष्य दिशारी चक्त्रस्बर्ती ने संतूर वादन की प्रस्तुति से की। दिशारी ने संतूर वादन में राग पुरिया धनाश्री में आलाप के साथ जोड़ की अवतारणा करते हुए चारताल में निबद्ध ध्रपद रचना बजायी। उनके साथ पखावज पर सिक्किम निशांत सिंह संगत की। द्वितीय चरण में गायन की प्रस्तुति पद्मश्री कलाकार उस्ताद वासिफुद्दीन डागर ने की। उस्ताद वासिफुद्दीन ने राग दरबारी में आलाप के साथ चारताल में निबद्ध रचना से सभी को भाव विभोर किया। जिसके बोल थे मुरारी त्रिभुवनपति। उनके साथ पखावज पर मोहन श्याम शर्मा की तानपुरे पर शिष्या डॉ. रिंकू लांबा ने संगत किया। तीसरा कार्यक्रम पं राजखुशी राम का स्वतंत्र पखावज वादन से हुआ, जिसमें उन्होंने विविध लयों को साकार किया। उनके साथ हारमोनीयम पर जमुना बल्लभ गुजराती ने संगत किया। उनकी दूसरी रचना राग अड़ाना में सूल ताल में निबद्ध प्रसिद्ध रचना भगवान शिव को समर्पित किया, जिसके बोल थे शिव शिव शिव शंभू भोला नाथ योगी महादेव, जिससे पूरा परिसर शिवमय हो गया। कार्यक्रम संचालन डॉ प्रीतेश आचार्य ने किया।