वाराणसी। सुरगंगा की निशा तबला सम्राट पं. किशन महाराज को समर्पित रही। काशी के प्रख्यात नादविद् को भावांजलि अर्पित करते हुए दिल्ली से आए प्रख्यात वीणावादक सिद्धार्थ बनर्जी ने राग यमन से शुरूआत की। सिद्धार्थ के साथ तबले पर डॉ. संदीप राव ने संगत की। निशा की दूसरी प्रस्तुति पं. किशन महाराज को समर्पित रही। इसमें तबला वादक प्रवीण उद्धव एवं श्रुति सील उद्धव ने तबला वादन से समां बांध दिया।
मंगलवार को भैंसासुर घाट पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पं. किशन महाराज के पुत्र पं. पूरण महाराज ने कहा कि पं. किशन महाराज की वादन शैली आने वाली कई सदियों तक शिक्षणीय एवं अनुकरणीय रहेगी। संगीत निशा के प्रमुख आकर्षण जीटीवी सारेगामापा कार्यक्रम के चारो फाइनलिस्ट इशिता विश्वकर्मा, तन्मय चतुर्वेदी, साहिल एवं सोनू गिल रहे। साहिल ने सय्योनी व बुलया की धमाकेदार प्रस्तुति से श्रोताओं को झूमा दिया। तन्मय चतुर्वेदी ने खईके पान बनारस वाला...और थाने में बैठे आन ड्यूटी पांडेय जी बजाए सीटी...पेश किया तो दर्शक भी उत्साह से भर उठे। इशिता विश्वकर्मा ने ओम नम: शिवाय व मिले हो तुम हमको... पेश किया। इसके बाद सोनू गिल ने फिर ले आया दिल...व दगाबाज रे...की सुमधुर प्रस्तुति की। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत गंगा पूजन और पीयूष मिश्र के सुरगंगा गीत से हुई। कलाकारों का स्वागत आनंद अग्रवाल, हेमंत अग्रवाल, लोकेश गुप्ता, राजेंद्र गोयनका, आलोक शाह, दीपक जायसवाल, अरूण सिंह, कमलेश अग्रवाल ने किया। धन्यवाद आलोक पारीख एवं संदीप पंड्या ने किया।
आज का कार्यक्रम
16 जनवरी की निशा ठुमरी साम्राज्ञी विदुषी सिद्वेश्वरी देवी के स्मृति में होगी। इसमें सुचरिता गुप्ता प्रस्तुति देंगी, दूसरे सत्र में बादशाह-ए-ग़ज़ल तलत अज़ीज सिरकत करेंगे।