वाराणसी। ऑनलाइन अपराध करने वालों पर जिले की पुलिस का वश नहीं चलता। यही वजह है कि आईटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों की तफ्तीश कागजों तक ही सीमित रह जाती है और भुक्तभोगियों के साथ न्याय नहीं हो पाता है। मौजूदा समय में जिला पुलिस की अपराध शाखा के पास आईटी एक्ट के तहत दर्ज 45 से ज्यादा ऐसे मामले हैं जिनसे संबंधित अपराधियों की गिरफ्तारी करना तो दूर उन्हें चिह्नित भी नहीं किया जा सका है। ऐसे में ऑनलाइन अपराध जिले की पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन कर रह गया है।
बैंक खाते से रुपये उड़ाने, बैंक खाते से खरीददारी करने, फेसबुक-व्हाट्स एप आदि से अश्लील मैसेज भेजने और फेसबुक-ईमेल आदि की आईडी हैक करने से संबंधित मामले जिले के थानों में दर्ज तो किए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पाती है। इसके पीछे की अहम वजह यह है कि फेसबुक, जीमेल, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का कार्यालय विदेश में होने के कारण पुलिस वहां संपर्क ही नहीं कर पाती है। वहीं, एटीएम का पासवर्ड हैक कर या एटीएम बदलकर बैंक खाते से रुपये उड़ाने वाले और खरीददारी करने वाले चिह्नित नहीं हो पाते हैं। कारण कि बिहार, झारखंड और एनसीआर से संचालित होने वाले इन गिरोहों के सदस्य वारदात को अंजाम देते ही फर्जी नाम-पते पर लिए गए मोबाइल का सिम बदल देते हैं और उन तक पुलिस का पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता है।