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संस्कृत से ही संस्कृति का विकास0

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वाराणसी। काशी सुमेरू पीठाधीश्वर नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि मनु स्मृति पर वो लोग आक्षेप लगा रहे हैं जिन्होंने कभी मनुस्मृति का दर्शन तक नहीं किया है। भारतीय संस्कृति सभी को जोड़ती है। विश्व में भारत अपनी सनातनी संस्कृति के कारण ही हमेशा सिरमौर रहा है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति को बचाने के लिए कृत संकल्पित होना होगा। संस्कृत के बिना संस्कृति के विकास की कल्पना तक नहीं की जा सकती।
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वह शनिवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पाणिनी भवन सभागार में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत के उत्थान से ही संस्कृत के छात्रों का भी उत्थान होगा। वैज्ञानिक भी इस बात को मान रहे हैं कि संस्कृत के बिना आधुनिकता का विकास संभव ही नहीं है। उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. राजीव रंजन सिंह, विशिष्ट अतिथि स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती और अध्यक्ष कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इसके उपरांत अशोक पांडेय ने वैदिक मंगलाचरण, सुधांशु मणि त्रिपाठी ने पौराणिक मंगलाचरण और स्वागत गीत प्रभाकर चौबे ने प्रस्तुत किया। छात्रसंघ उपाध्यक्ष अनुराग पांडेय ने पुरातन छात्रों एवं अतिथियों का सम्मान किया। स्वागत भाषण अध्यक्ष बृजेश त्रिपाठी, संचालन डा. अजय शुक्ला ने किया। इस दौरान विनय मिश्रा, प्रेमसागर मिश्रा, रामदयाल पांडेय, बृजनंदन दूबे आदि मौजूद रहे।
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