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अविद्या नष्ट करेंगे तभी होगी बुद्ध की प्राप्ति: दलाई लामा

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वाराणसी। धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि अविद्या को नष्ट करोगे तभी बुद्ध की प्राप्ति होगी। कर्म की वजह से ही दुख उत्पन्न होता है। दुनिया में सभी व्य्क्ति सुख, खुशी और मित्र चाहते हैं। क्रोध ही शत्रु का आधार है। जो दुख हैं परेशानियां हैं वह समस्याएं हमारी पैदा की हुई हैं। इसका समाधान भी हमको ही निकालना होगा। सभी समस्याओं के मूल में मनुष्य की नकारात्मक भावनाएं हैं।
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रविवार को केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह के तहत दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के समापन के दौरान धर्मगुरु ने कहा कि जब तक आपके अंदर बुरे विचार होंगे, आप मन का बेहतर उपयोग नहीं कर सकेंगे। भोगवादी समाज के विस्तार से आज संपूर्ण मानव समुदाय के समझ कई अनसुलझी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। भारत के प्राचीन ज्ञान में इतना सामर्थ्य है कि वह पूरी दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सकता है।
संस्थान के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने कहा कि धर्मगुरु के प्रयासों से लोग संपूर्ण विश्व में नैतिक आचरण को आगे बढ़ा रहे हैं। सेमिनार के तीसरे सत्र का संचालन स्मिथ कॉलेज के प्रो. जे गारफील्ड ने किया। इस सत्र में कोलंबो विश्वविद्यालय श्रीलंका के प्रो. असंग तिलकरत्ने ने थेरवाद में मन की अवधारणा, पेरिस के भौतिक शास्त्री प्रो. मिचेल बिटबॉल ने अर्विन श्वेनगर, उपनिषद, तथा बौद्ध धर्म में मन की अवधारणा का वैज्ञानिक विवेचना पेश की। डॉ. थुबटेन जुम्पा ने बौद्ध धर्म में मन की प्रकृति पर अपना शोध प्रस्तुत किया। चतुर्थ सत्र का संचालन जेएनयू की प्रो. रेनूका सिंह ने किया। इस सत्र में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के बायोमेडिकल वैज्ञानिक प्रो. सिऑन रेमॉन ने शरीर और मन की वैज्ञानिक क्रिया विधि पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।
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सेमिनार में सिक्किम के पूर्व उपराज्यपाल डॉ. बीपी सिंह, कुलसचिव आरके उपाध्याय, प्रो. हरिकेश सिंह आदि मौजूद रहे। सोमवार को दलाई लामा संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करने के साथ ही पुरातन छात्रों व यहां के शिक्षकों को आशीर्वचन देंगे।
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