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प्रो. अर्कनाथ बोले, कर्मकांड को कौशल विकास से जोड़ें

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वाराणसी। कर्मकांड को कौशल विकास से जोड़कर इस क्षेत्र में अधिक रोजगार सृजन करने की जरूरत है। देववाणी संस्कृत की पढ़ाई करने वाले कभी बेरोजगार नहीं रह सकते। ज्योतिष, पूजा-पाठ और कथा-प्रवचन में भी अच्छे अवसर हैं। रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के कुलपति प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने ये बातें कहीं।
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मुख्य अतिथि ने कहा कि संस्कृत और संस्कृति से भारत की प्रतिष्ठा जुड़ी है। संस्कृत के प्रति लोगाें का रुझान बढ़ाना बहुत जरूरी है। हालांकि समय-समय पर संस्कृत के पाठ्यक्रमों में भी बदलाव किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी काशी संस्कृत भाषा की राजधानी है। संस्कृत ऐसी भाषा है, जिसके अध्ययन से धर्म और अंत में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के जरिये समस्त इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति होती हैं। इसके बाद लोग मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। हमें ऐसी विद्या का अध्ययन करना चाहिए, जिससे मुक्ति मिल सके।
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