वाराणसी। विश्वनाथ मंदिर प्रशासन को बांस फाटक पर एक भवन में खुदाई कराकर जमीन में दबे प्राचीन शिवलिंग को सुरक्षित बाहर निकलवाने में गुरुवार को सफलता मिल गई। आठ से 10 फीट गहराई में दबे शिवलिंग के लिए महीने भर से खुदाई कराई जा रही थी। अब इस शिवलिंग की वैदिक रीति से प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाएगी।
वर्ष भर पहले 1.33 करोड़ रुपये की लागत से बांस फाटक पर एक भवन खरीदा गया था। भवन के भीतर एक कक्ष में उपासना स्थल की जगह पर शिवलिंग के दबे होने की जानकारी मिलने के बाद विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने खुदाई आरंभ कराई थी। महीने भर चली खुदाई के बाद गुरुवार को शिवलिंग निकाल लिया गया। विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने बताया कि शिवलिंग काफी प्राचीन है और बड़ा भी। इसके वैशिष्ट्य का पता लगाने के लिए विद्वानों और विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। शिवलिंग को भवन में ही सुरक्षित रखवा दिया गया है। विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी का कहना है कि यह शिवलिंग काशी खंडोक्त भी हो सकता है। इसकी वैदिक रीति से प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाएगी।