वाराणसी। अब तक कांग्रेस से रामनगर पालिका परिषद की निवर्तमान अध्यक्ष रहीं रेखा शर्मा ने पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध निर्दल उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया है। उनका कहना है कि वे अपने निर्णय पर कायम रहेंगी। दशकों से से कांग्रेस का झंडा थाम कर पार्टी के लिए मरने जीने वाली नेता पार्टी पदाधिकारियों से खासी खफ ा हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा कि रामनगर में कांग्रेस की हार तय है।
रामनगर में इस चुनाव से पहले दोनों ही बार यह सीट सामान्य थी। तब कांग्रेस ने रेखा शर्मा पर ही भरोसा जताया और वह दोनों बार पार्टी के भरोसे पर खरी उतरीं। पहली बार वह कांटे की टक्कर में 700 वोट से चुनाव जीतीं तो दूसरी बार निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 3700 मतों से पराजित किया। इस बार कांग्रेस ने उनका टिकट काट कर बनारस के ही एक रसूखदार राजनीतिक ब्राह्मण परिवार के दबाव में मधुकर पांडेय को प्रत्याशी बना दिया। मधुकर पांडेय एमएलसी का चुनाव लड़ चुके हैं जिसमें उन्हें करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
इतना ही नहीं कांग्रेस ने चुपके से मधुकर को पार्टी का सिंबल दिया। रामनगर पालिका परिषद अध्यक्ष ही नहीं सभासदों की सूची भी अति गोपनीय रखी गई। रेखा शर्मा ने बातचीत में बताया कि वह जब मंगलवार को नामांकन करने पहुंची तब तक उनके पास सिंबल नहीं था तो उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना पर्चा तैयार किया। लेकिन अंतिम समय में दोपहर बाद दो बजे उन्हें यह बताया गया कि पार्टी का सिंबल मधुकर पांडेय को दिया जा रहा है तो उन्होंने निर्दल प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया।
वहीं रामनगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को लेकर भी झाम फंसा हुआ है। पार्टी ने पहले आलोक जायसवाल को सिंबल दिया था। उन्होंने नामांकन भी कर दिया था। मंगलवार को पार्टी ने अचानक राकेश जायसवाल को सिंबल देकर उन्हें अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। हालांकि निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक राकेश नामांकन के दौरान तक सिंबल नहीं लगा पाए। उन्होंने निर्दल प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया। पार्टी नेता राकेश को सिंबल देने के सिलसिले में भी गुरुवार को डीएम से मिलेंगे।