वाराणसी। गोमुख से बंगाल की खाड़ी तक पतित पावनी गंगा का एक-एक इंच सीमांकन कराया जाएगा। गंगा के सीमांकन के लिए जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को निर्देश दिया गया है। सीमांकन के बाद दोनों किनारों पर गंगा की भूमि चिह्नित कर अतिक्रमण मुक्त कराई जाएगी। यह जानकारी केंद्रीय जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती ने मंगलवार को दी। उन्होंने गंगा की रक्षा की दिशा में हाल में आए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एएनजीटी) के फैसले को ऐतिहासिक करार दिया। कहा कि सरकार इसका क्रियान्वयन कराएगी।
सर्किट हाउस में ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उमा भारती ने कहा कि गंगा निर्मलीकरण के लिए केंद्र सरकार ठोस कार्ययोजना पर काम कर रही है। पहली बार गंगा का सीमांकन कराने का निर्णय लिया गया है ताकि दोनों किनारों का चिह्नांकन कर गंगा का पाट सुनिश्चित किया जा सके। सर्वे के बाद गंगा की भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जाएगी। गंगा के सौ मीटर के दायरे में पहले से हुए अवैध कब्जों को हटाने और नए निर्माण रोकने के लिए राज्य सरकारों से मदद ली जाएगी। गंगा में टेनरियों का रासायनिक कचरा न जाने पाए इसके लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इसकी मॉनीटरिंग कराई जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कचरा प्रबंधन के साथ गंगा घाटों को स्वच्छ रखने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। गंगा निर्मलीकरण की कार्ययोजना पर अमल करने के लिए अफसरों की बैठक दिल्ली में बुलाई गई है। काशी में कछुआ सेंक्चुअरी हटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सेंक्चुअरी शिफ्ट कराने के लिए कह दिया गया है। इस दिशा में आने वाली बाधाओं को राज्य सरकार के साथ मिलकर दूर किया जाएगा।
मायावती का इस्तीफा धमकी नहीं, दलितों के साथ किए अन्याय का प्रायश्चित : उमा भारती
उमा भारती ने राज्य सभा से बसपा सुप्रीमो मायावती के इस्तीफे को दलितों, दबे-कुचले लोगों और पिछड़ों के साथ किए गुनाहों का प्रायश्चित बताया। उन्होंने कहा कि मायावती भारतीय राजनीति के पटल से अंतर्धान हो चुकी हैं। उन्होंने उन्हीं दलितों, गरीबों का गला घोंटा है, जिनकी बदौलत वह तीन बार यूपी की सीएम बनीं। अब जब भाजपा उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के देश का राष्ट्रपति बनने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है, तब वह दलित प्रेम का ढोंग रच रही हैं। इस इस्तीफे को धमकी के तौर पर नहीं लिया जा सकता। उमा भारती ने कहा कि जब यूपी के दलितों, सवर्णों ने मिलकर उनको मौका दिया, तब वह उनके लिए कुछ नहीं कर पाईं। पूरा देश जान चुका है कि अब मायावती धनिक वर्ग की नेता हैं, गरीबों-दलितों की नहीं।