वाराणसी। संकटमोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा में गुरुवार को जब सितार पर पिता-पुत्र पं. नरेंद्र मिश्र और पं. अमरेंद्र मिश्र ने राग सरस्वती से देवी की आराधना की तो पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
समारोह की शुरुआत दिल्ली की गीता चंद्रन और शरण्या चंद्रन के भरतनाट्यम से हुआ। उन्होंने शुरुआत देवी स्तुति से की। इसके बाद उन्होंने पंचाक्षर और तिल्लाना की सुंदर प्रस्तुति की। उनके साथ शरण्या चंद्र ने जुगलबंदी कर सभी को भाव विभोर कर दिया।
दूसरी प्रस्तुति जयश्री रामनाथ ने कर्नाटक शैली की गायकी प्रस्तुत कर दक्षिण भारतीय कला से जोड़ दिया। उन्होंने राग पूरिया कल्याण में मीनाक्षी में मुदम सुनाया। इसके बाद उन्होंने राग बिहाग में तराना की प्रस्तुत की। इसी राग में इन्होंने शिव पंचाक्षर नागेंद्र हाराय त्रिलोचचनाय भी सुनाया।
बुधवार की आधी रात्रि के बाद विश्व विख्यात गायक उस्ताद राशिद खान ने अपनी प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर पंडित विजय घाटे, हारमोनियम पर पंडित अजय जोगलेकर, सारंगी पर मुराद अली ने लाजवाब संगत की। चेन्नई के शशांक सुब्रमण्यम ने बांसुरी पर कर्नाटक शैली में वादन पर एक अलग धारा ही प्रवाहित कर दी। उनके साथ तबले पर पंडित तन्मय बोस व मृदंग पर पीएसएनवीएस फाल्गुनी ने कुशल संगत किया। दिल्ली से आए संतूर वादक अभय रुस्तम सपोरी ने स्वनिर्मित राग महाकाली बजाकर भक्ति की सरिता बहा दी। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खान व ऋषि शंकर उपाध्याय ने लाजवाब संगत कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। अगले कार्यक्रम में दिल्ली से आए पंडित भोलानाथ मिश्र ने गायन की शुरुआत राग नट भैरव से किया। उनके साथ तबले पर पंडित, नंदकिशोर मिश्रा व हारमोनियम पर पंडित धर्म नाथ मिश्रा ने संगत की। अंतिम कड़ी में पंडित गौरव मजूमदार ने सितार पर राग परमेश्वरी की अवधारणा कर कार्यक्रम को सुहाना बना दिया।