वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा होने की संभावनाओं को देखते हुए चुनाव आयोग मतदान के लिए एम-3 ईवीएम का इस्तेमाल करेगा। इस मशीन में 384 उम्मीदवारों के साथ नोटा को भी जोड़ा जा सकेगा।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय क्षेत्र से 42 प्रत्याशी मैदान में थे। लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा के बाद से ही वाराणसी से चुनाव लड़ने वाले दावेदार सामने आने लगे हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ तमिलनाडु के किसान नेता पी अय्याकन्नू ने यहां से 111 किसानों को चुनाव लड़ाने का दावा किया था। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जस्टिस सीएस कर्णन, भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर सहित कई संभावित दावेदार हैं। वर्ष 2014 में प्रयोग की गई ईवीएम में अधिकतम चार बैलेट यूनिट जुड़तीं और 64 प्रत्याशियों का नाम इसमें जोड़ा जा सकता है। प्रत्याशियों की संख्या 64 से ज्यादा होने पर चुनाव आयोग के पास बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने का विकल्प होता है। मगर, बीईएल की ओर से तैयार एम-3 ईवीएम में एक साथ 24 बैलेट यूनिट को जोड़ा जा सकता है और नोटा सहित 384 उम्मीदवारों का नाम शामिल किया जा सकता है।
वाराणसी में नई तकनीक की ईवीएम एम-3 का प्रयोग किया जाएगा। फिलहाल वाराणसी में 4756 बैलेट यूनिट, 3518 कंट्रोल यूनिट और 3518 वीवीपैट है। आवश्यकता पड़ने पर और बैलेट यूनिट मंगाई जा सकती हैं। -विनय कुमार, अपर जिलाधिकारी शहर
एम-3 ईवीएम एक नजर में
नई तकनीक की एम-3 ईवीएम से छेड़छाड़ होने पर वह काम करना बंद कर देती है। सॉफ्टवेयर में खराबी आई तो डिस्प्ले पर प्रदर्शित हो जाएगी। कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट को मैच करना पड़ता है और मैच नहीं होने पर भी यह काम नहीं करेगी।